डीडीहाट (पिथौरागढ़)। सियासी लाभ के लिए खोले गए तमाम स्कूल-कॉलेज जहां नाममात्र की छात्रसंख्या होने पर भी अस्तित्व में हैं, वहीं राजनीति में नगण्य दखल रखने वाले आदम जनजाति वनराजि बच्चों को शिक्षित करने के लिए जौलजीबी में खोला गया स्कूल वर्ष 2017 में कम छात्रसंख्या के बहाने बंद कर दिया गया। हालांकि इस स्कूल के बच्चों को दूसरे स्कूलों में शिफ्ट करने के आदेश हुए थे लेकिन अधिकतर बच्चे दूर के स्कूल में जाने की बजाय घर बैठ गए। बच्चों को शिक्षित कर इस आदम समाज को मुख्य धारा से जोड़ने के प्रयासों को इससे खासा झटका लगा है।
वनराजियों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए पूर्व विधायक स्व. हीरा सिंह बोरा ने कई दशकों तक काम किया। उनका संघर्ष काम आया। वर्ष 2000 में आदिम वनराजि बच्चों को शिक्षा देने के उद्देश्य से भारत सरकार के जनजाति मंत्रालय ने अनुसूचित जनजाति सेवा संस्थान संस्था के माध्यम से जौलजीबी में विद्यालय स्थापित किया। आवासीय स्कूल खुला तो वनराजि परिवार बच्चों को इस स्कूल में भेजने लगे। वनराजि बच्चों को घर जैसा ही माहौल मिल सके और किसी तरह की परेशानी न हो इसके लिए हॉस्टल में वार्डन भी वनराजि परिवार के लोगों को ही रखा गया। पूर्व विधायक बोरा के प्रयासों से इस विद्यालय में वनराजि बच्चों की संख्या 50 से अधिक हो गई थी। स्कूल संचालन के लिए सालाना केवल 10 लाख रुपये की धनराशि मिलती थी।
वर्ष 2013 में हीरा सिंह बोरा की मृत्यु के बाद स्कूल प्रबंधन अधिक ध्यान नहीं दे पाया। इसके बाद दिल्ली की एक संस्था सार्थक प्रयास के माध्यम से भी स्कूल संचालन की कोशिश की गई। मार्च 2017 में इस स्कूल को फंड मिलना भी बंद हो गया। मार्च 2017 से 31 जुलाई तक अपने प्रयासों से डीडीहाट यूथ सोसाइटी ने इस स्कूल को संचालित किया। अगस्त 2017 में यहां पढ़ने वाले सभी 48 वनराजि बच्चों को बलुवाकोट के जनजाति स्कूल में दाखिला दिलाने के निर्देश मंत्रालय की ओर से जारी हुए, लेकिन कक्षा तीन से पांच तक के 12 बच्चों और कक्षा एक व दो के 20 बच्चों ने किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया। यह 32 बच्चे अब भी घरों में ही बैठे हैं। संवाद
डेढ़ हजार से भी कम है वनराजि जनजाति की आबादी
उत्तराखंड की आदम जनजाति वनरावत पिथौरागढ़ जिले के डीडीहाट ब्लाक के कूटा चौरानी, कनालीछीना ब्लॉक के कूटा जमतड़ी और औलतड़ी और धारचूला ब्लाक के चिफलतरा, गणागांव, भकतिरूवा, किमखोला, थामाधूरा में निवास करते हैं। इसके अलावा कुछ परिवार चंपावत जिले के खिरद्वारी गांव में भी रहते हैं। राज्य में इनकी जनसंख्या 1500 से कम है।
जानकी है हाईस्कूल पास करने वाली पहली वनराजि बालिका
डीडीहाट। वनराजि समाज शिक्षा के क्षेत्र में काफी पिछड़ा रहा। तमाम प्रयासों के बावजूद बालिकाओं की शिक्षा में रुचि कम ही रही। वनराजि समाज से जानकी ने वर्ष 2016 में हाईस्कूल पास किया था। जानकी अपने समाज से हाईस्कूल पास करने वाली पहली बालिका बनी थी। इस समाज से केवल दो ही लोग सरकारी नौकरी में हैं।
गगन रजवार दो बार विधायक रहे
डीडीहाट। भले ही वनराजि समाज अभी भी पूरी तरह से समाज की मुख्य धारा से नहीं जुड़ सका है, लेकिन वनराजि समाज से राजनीति में विधान सभा तक प्रतिनिधित्व हो चुका है। गगन रजवार दो बार धारचूला से विधायक चुने गए।
1964 से वनराजियों के लिए काम करते रहे हीरा सिंह बोरा
डीडीहाट। अनुसूचित जनजाति सेवा संस्थान के माध्यम से वनराजियों के बच्चों को शिक्षित करने की मुहिम चलाने वाले पूर्व विधायक स्व.हीरा सिंह बोरा ने वर्ष 1964 से कार्य शुरू किया था। उस दौर में उन्होंने बियाबान जंगलों में रहने वाले वनराजियों के बीच जाकर उनको अक्षर ज्ञान कराने की मुहिम शुरू की। पिथौरागढ़ के वनराजि गांवों के साथ ही चंपावत के खिरद्वारी गांव जाकर भी वनराजियों को भी शिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आवासीय विद्यालय की छात्र संख्या कम हो गई थी। शासन के निर्देश के तहत ही जौलजीबी में संचालित होने वाले विद्यालय का संचालन बंद किया गया। जो बच्चे इस आवासीय विद्यालय में पढ़ते थे उन्हें अन्य विद्यालयों में प्रवेश दिलाया गया है। शिक्षा विभाग के माध्यम से वनराजि बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। - डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, जिलाधिकारी, पिथौरागढ़।