सातशिलिंग-थल मार्ग के सुधारीकरण और चौड़ीकरण में बरती गई अनियमितताओं के खिलाफ बुधवार को पंचायत प्रतिनिधियों और क्षेत्रीय लोगों ने सलमोड़ा के पास पांच घंटे तक धरना दिया। धरने पर बैठे लोग दो घंटे तक बारिश में भीगते रहे। वार्ता के लिए पहुंचे तहसीलदार हरीराम को आंदोलनकारियों ने बैरंग लौटा दिया। बाद में एसडीएम अनुराग आर्य ने धरनास्थल पर पहुंचकर लोगों को आश्वासन दिया कि सड़क निर्माण की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी गई है। इसमें प्रशासन के अधिकारी और पंचायत प्रतिनिधि रहेंगे। 15 दिन में कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। इस आश्वासन पर फिलहाल धरना समाप्त कर दिया गया।
जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष किशन सिंह भंडारी के नेतृत्व में पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार बुधवार सुबह नौ बजे से धरना शुरू किया गया। दो घंटे बाद तहसीलदार मौके पर पहुंचे लेकिन लोगों ने उनकी बात नहीं सुनी। श्री भंडारी ने कहा कि सातशिलिंग-थल मार्ग को स्टेट हाइवे का दर्जा मिला है। इसके सुधारीकरण पर करीब 50 करोड़ रुपये की राशि खर्च की गई है, लेकिन हर जगह दीवारें धंस गई हैं। हॉटमिक्स उखड़ गया है। पानी के निकास का कोई इंतजाम नहीं है। अति महत्व की इस सड़क के निर्माण में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, नए सिरे से सड़क का निर्माण किया जाना बेहद जरूरी है।
भंडारी ने आरोप लगाया कि सड़क निर्माण करने वाला ठेकेदार खुद को सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़ा बताकर लोगों को धमकाता है। यह भी जांच के दायरे में आना चाहिए। धरने पर जिला पंचायत सदस्य जगदीश कुमार, जमुना लोहिया, गोदावरी देवी, हयात सिंह धारियाल, गिरीश पांडे, द्रोपदी देवी, मनोज भट्ट, पप्पू डोबाल, हरेंद्र सिंह, गोकुल कुमार, नरेंद्र कफलिया, कुंदन चौहान, सुजीत धामी समेत सातशिलिंग से लेकर थल तक के लोग शामिल हुए।