भारतीय सेना 15 जनवरी 1948 को स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आई थी। ब्रिटिश सरकार ने जनरल करिअप्पा को भारतीय सेना की कमान सौंपी थी। तब से लेकर आज तक भारतीय फौज ने विभिन्न लड़ाइयों में दुश्मनों के दांत खट्टे करने के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में भी अहम योगदान दिया था। सेना के रिटायर्ड जूनियर कमीशंड आफीसर और जिला सैनिक कल्याण परिषद के सदस्य नरेंद्र चंद ने कहा कि आर्मी-डे पर सेना के स्वाभिमान की याद ताजा होती है।
आजादी के बाद स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में आई भारतीय सेना ने 1948, 1962, 1965, 1971 की लड़ाइयों के साथ-साथ कारगिल युद्ध में भी अदम्य साहस का परिचय दिया था। नरेंद्र चंद का कहना है कि भारतीय सेना में उत्तराखंड के सैनिकों का रोल भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। इस समय भी भारतीय सेना के जनरल पद पर उत्तराखंड के बिपिन रावत तैनात हैं। इससे पहले जनरल बीसी जोशी भी इस पद रह चुके हैं। देश की रक्षा में उत्तराखंड के जवानों के बलिदान को हमेशा याद किया जाता है।
वह कहते हैं कि राष्ट्र के विकास और निर्माण में सेना ने भूमिका निभाई है। सेना देश में आने वाली आपदा के समय राहत और बचाव के काम में लगी रहती है। आंतरिक सुरक्षा में भी वह अपना योगदान देती रहती है। सेना ने आजादी के बाद अपनी क्षमता को बढ़ाया है और इस समय सेना के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है। वह कहते हैं कि आर्मी-डे के मौके पर देशवासियों को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह सेना का मनोबल बढ़ाने वाला काम करे।