रोडवेज के पिथौरागढ़ डिपो की खस्ता हालत का खामियाजा यात्री भुगत रहे हैं। चालकों के अभाव में डिपो की दर्जनों बसों के पहिए जाम हैं। बस नहीं मिलने से लोग टैक्सियों में सफर करने पर मजबूर हैं। परिवहन निगम को रोज लाखों रुपए का नुकसान हो रहा है। निगम प्रबंधन और सरकार की ओर से कोई पहल सामने नहीं आ रही है।
हाल में पिथौरागढ़ डिपो को 42 नई बसें मिली थी। इसके बाद डिपो का बस बेड़ा 103 का हो गया था। लखनऊ, आगरा, कानपुर और गुरुग्राम के लिए पिथौरागढ़ से सीधी बस सेवा शुरू होनी थी, लेकिन चालकों की कमी के ये बस सेवाएं शुरू ही नहीं हो पाई, जबकि बरेली, दिल्ली, देहरादून की कई बस सेवाएं संचालित नहीं हो रही हैं। चालकों के अभाव में डिपो की 32 बसें वर्कशाप में खड़ी हैं। पिथौरागढ़ डिपो में चालकों के 42 पद खाली हैं। परिचालकों के भी 22 पद रिक्त हैं।
चालकों की कमी से निगम के बस खरीदने पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बसों की खरीद से पहले चालकों का इंतजाम परिवहन निगम और सरकार को करना चाहिए था। बहरहाल बसों के चक्के जाम होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों को मजबूरन टैक्सियों से यात्रा करनी पड़ रही है।
12 की मध्यरात्रि से रोडवेज बसों के पहिए रहेंगे जाम
पिथौरागढ़। चालकों की कमी के विरोध में रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने आंदोलन की रणनीति तय कर ली है। परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष मोहन भंडारी ने बताया कि चालकों की कमी के संबंध में 6 दिसंबर को परिषद के पदाधिकारियों की देहरादून में निगम प्रबंधन से वार्ता विफल रही है। परिषद ने निर्णय लिया है कि 9 और 10 दिसंबर को परिवहन निगम कर्मी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। 12 दिसंबर की मध्यरात्रि से चक्काजाम किया जाएगा।
चालकों के अभाव में 32 बसों का संचालन नहीं हो पा रहा है। शासन स्तर पर चालकों की भर्ती होनी थी। भर्ती प्रक्रिया रुक गई है। कब भर्ती होती है, इसका पता नहीं है। बसों का संचालन न होने से डिपो को प्रतिदिन 2 लाख रुपए का नुकसान हो रहा है। -आलोक बनवा, सहायक महाप्रबंधक, पिथौरागढ़ डिपो।