दारमा वैली में सड़क निर्माण का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। पिछले चार वर्षों से घाटी के गांवों तक सड़क सुविधा पहुंचाने के लिए कार्य किया जा रहा है। यदि कार्य इसी तरह चलता रहा तो इस सड़क के निकट भविष्य में पूरा होने की कोई उम्मीद नहीं है। प्रशासन कार्यदायी संस्था से इतना खफा है कि उसने उससे काम हटाकर दूसरी संस्था को सौंपने तक की चेतावनी दी है। बावजूद इसके कार्यदायी संस्था पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।
धारचूला तहसील के सोबला से तिदांग तक 40 किमी सड़क बनाने का जिम्मा सीपीडब्ल्यूडी को सौंपा गया है। क्षेत्र में पंपाबे वैली के पास जहां बेहद खतरनाक जोन है वहीं सात नाले भी आफत बने हैं। इन नालों में तेजम, नागलिंग, बागलिंग बड़े नाले हैं, जहां पर सड़क बनाना आसान नहीं है। सभी सात नालों पर पुल बनाए जाने हैं, लेकिन अब तक एबडमेंट नहीं बने हैं। ऐसे में पुल बनाना तो दूर की बात है।
कार्यदायी संस्था ने श्रमिकों के भरोसे सड़क को छोड़ा है। मशीनरी भी ठीक से काम नहीं कर रही है। पंपाबे वैली बेहद डेंजर जोन हो गया है। एसडीएम धारचूला आरके पांडेय ने बीते दिनों क्षेत्र का भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि पंपाबे में भारी मात्रा में भूस्खलन से बोल्डर गिरे हैं। सड़क पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। इस जगह पर रोड कटिंग का कार्य कर रही एस एंड एस कंपनी पूर्व में ही कार्य छोड़कर भाग गई है। हाल ही में डीएम ने कार्यदायी संस्था को नोटिस भी दिया है।
यदि इसी गति से कार्य चलता रहा तो अगले तीन वर्षों तक भी दारमा वैली में सड़क का सपना साकार नहीं हो पाएगा। इस समय दारमा वैली का अन्य स्थानों से संपर्क पूरी तरह कटा है। गांव में खाद्यान्न तो प्रशासन की ओर से पहुंचा दिया गया है लेकिन ग्रामीणों की अन्य जरूरतों के लिए आवाजाही पूरी तरह ठप पड़ी है। दारमा घाटी के 13 गांवों में करीब 2500 की आबादी है।
दारमा घाटी के गांव
दुग्तु, नागलिंग, दांतू, ढांकर, तेजम, मार्छा, सिपू, फिलम, बौन, चल, बालिंग, सेला, बुंगलिंग।
ऐसे हालातों में कैसे होगी कैलाश की राह आसान
पिथौरागढ़। कैलाश मानसरोवर यात्रा की राह भी आसान नहीं है। चीन लिपुपास तक फोरलेन सड़क निर्माण में तेजी से जुटा है, लेकिन अभी हम लखनपुर, नजंग से ही पार नहीं पा सके हैं। नजंग-बूंदी का रास्ता ब्लॉस्टिंग से पूरी तरह खत्म हो गया है। मई से नजंग का रास्ता काटा जा रहा है, लेकिन अब तक खास प्रगति नहीं हुई। यहां 2.4 किमी सड़क का निर्माण होना है। इसमें से महज 635 मीटर पहाड़ काटना है, जो नहीं काट पा रहे हैं। कार्यदायी संस्था 67 बीआरओ ने जल्द सड़क बनाने का भरोसा तो दे दिया, लेकिन कार्य बेहद ही धीमी गति से चल रहा है। सड़क बनाने के लिए मशीनरी पर्याप्त नहीं है। यहां भी श्रमिकों के भरोसे कार्य छोड़ा है। एसडीएम ने हाल ही में लगातार 10 दिन गुंजी क्षेत्र में भ्रमण किया। उन्होंने कहा कि यदि इसी गति से कार्य चलता रहा तो सड़क किसी भी हाल में नहीं बन सकती है। पिछले हफ्ते धारचूला भ्रमण पर गईं प्रभारी डीएम वंदना ने भी कार्य की संतोषजनक प्रगति नहीं होने पर कार्यदायी संस्थाओं को कड़ी फटकार लगाई थी।
सीपीडब्ल्यूडी 67 बीआरओ का कार्य बेहद सुस्ती से चल रहा है। दारमा घाटी का कार्य लोनिवि और लखनपुर-नजंग का कार्य 65 बीआरओ को सौंपा जाना चाहिए। इस संबंध में डीएम को भी पत्र लिखा है।
-आरके पांडेय, एसडीएम धारचूला