मुनस्यारी के फाफा की गर्भवती महिला इंदिरा देवी को डोली में लाते गांव के लोग।
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मुनस्यारी(पिथौरागढ़)। तंत्र की लापरवाही और उपेक्षा के कारण एक गर्भवती महिला समय से अस्पताल नहीं पहुंच सकी। गर्भ में पल रही नन्ही जान ने दुनिया में आने से पहले ही दम तोड़ दिया।
मुनस्यारी विकासखंड का दुर्गम गोरीपार क्षेत्र जुलाई संपर्क विहीन है। यह मार्ग बसंतकोट गांव से आगे बोथी गांव होते हुए जौलढुंगा तक ध्वस्त है। बुधवार की सुबह फाफा गांव के विनोद सिंह की पत्नी इंदिरा देवी को प्रसव पीड़ा हुई। क्षेत्र के जौलढुंगा स्थित स्वास्थ्य केंद्र में एएनएम के न होने से परिजन इंदिरा को डोली में रखकर मदकोट ले गए। 108 एंबुलेंस से संपर्क करने पर ईंधन भराने थल जाने की बात कही गई। इसके बाद परिजन दर्द से तड़पती इंदिरा को लेकर मदकोट अस्पताल गए लेकिन वहां पर भी कोई मदद नहीं मिली। आसपास के लोगों से पूछताछ करने पर किसी ने बरम क्षेत्र में एक एएनएम होने की जानकारी दी। इसके बाद परिवार के लोग निजी वाहन को बुक कर प्रसव पीड़िता को बरम लेकर गए। लगभग दो घंटे तक गर्भवती को वहां पर रखा गया। वहां पर भी प्रसव न होने के बाद तड़पती इंदिरा को धारचूला या पिथौरागढ़ ले जाने की सलाह दी। तब तक शाम के चार बज चुके थे। धारचूला की दूरी कम होने से परिजनों ने इंदिरा को धारचूला ले जाने का निर्णय लिया। धारचूला पहुंचने पर जब डॉक्टरों ने गर्भवती का चेकअप किया तो शिशु की गर्भ में ही मौत हो चुकी थी। यह सुनकर परिजनों की आंखों में आंसू आ गए।
सड़क बंद है। पैदल रास्ते भी क्षतिग्रस्त हैं। क्षेत्र में उपचार की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों के सहयोग से गर्भवती पत्नी को डोली में बैठाकर सड़क तक पहुंचाया। मदकोट से लेकर बरम तक सुरक्षित प्रसव के लिए कोई सुविधा नहीं मिली।
- विनोद सिंह, इंद्रा देवी का पति।
- गांव की सड़क लंबे समय से बंद है। कई बार मांग करने के बाद भी सड़क नहीं खोली जा रही है। लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं। यदि सड़क खुली होती तो गर्भ में ही शिशु की मौत नहीं होती। शासन प्रशासन की उपेक्षा के कारण क्षेत्र के लोग इस तरह का दंश झेल रहे हैं।