मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। मौसम की बेरुखी के कारण मल्ला जोहार पर प्रवास की राह आसान नहीं है। धापा-मिलम मार्ग पर रविवार को छिरकानी के पास पहाड़ी से बर्फ की चट्टान खिसकने से रास्ता बंद हो गया था। बीआरओ ने सड़क खोलने के लिए डोजर लगा कर पैदल मार्ग को भी आवागमन के लिए खोल दिया है।
सीमांत क्षेत्र में मौसम लगातार बदल रहा है। छिरकानी के पास बर्फीली चट्टान खिसकने से लोगों को उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांवों में प्रवास पर जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस मार्ग पर घोड़े-खच्चर वाले लोग भी जान हथेली पर रख यात्रा कर रहे हैं। बर्फीली चट्टान के ऊपर से रास्ता बनाया गया है। बेमौसमी बारिश के कारण प्रवास पर जाने वाले लोगों की परेशानियां काफी बढ़ गईं हैं। ऊपरी क्षेत्र में सोमवार को भी बारिश जारी रही। खतरनाक मौसम में भी लोग प्रवास पर निकल रहे हैं।
क्षेत्र के दरकोट, दरांती, सुरिंग, मर्तोलीबाड़ा, साईपोलो, लीलम, नानासेम, सरमोली, धापा गांवों के करीब 500 लोग चीन सीमा से लगे अपने गांवों में खेतीबाड़ी और कीड़ाजड़ी निकालने के लिए जाते हैं। कीड़ाजड़ी के लिए जाने वाले लोग तो एक-डेढ़ माह से लौट आते हैं लेकिन खेतीबाड़ी के लिए जाने वाले ग्रामीण मध्य अक्तूबर के बाद वापसी करते हैं। मौसम की बेरुखी के कारण इस बार लोगों को प्रवास पर जाने में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
इन गांवों में जाते हैं प्रवास पर
मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। उच्च हिमालयी क्षेत्र में प्रवास पर जाने वाले ग्रामीण मिलम, बुर्फू, मर्तोली, बिल्जू, टोला, खिलांच, ल्वा, मापा, गनघर, रिलकोट, बुगडियार, नाहरदेवी, रालम गांवों में जाते हैं। ग्रामीण गांवों में आलू, जंबू, गंदरायण, कुटकी, कालाजीरा, फांफर आदि की खेती करते हैं। अक्तूबर में वह खेतीबाड़ी समेट कर निचले गांवों में लौट आते हैं।