फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pithoragarh News: हादसे के बारे में जिसने भी सुना आंखें हो गईं नम

Mon, 09 Oct 2023 12:59 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
विज्ञापन
धारचूला-लिपुलेख मोटर मार्ग में दुर्घटना स्थल पर रेस्क्यू के दौरान मौजूद पुलिस और एसएसबी के अ​धि
विज्ञापन
धारचूला (पिथौरागढ़)। घट्टाबगड़-गुंजी सड़क बनने के बाद यह सबसे बड़ा हादसा है जिसमें करीब सात लोगों के मारे जाने की आशंका है। मलबे में दबी जीप में एक ही परिवार के तीन बच्चे भी शामिल हैं। इस हादसे के बारे में जिसने भी सुना उसकी आंखें नम हो गईं।
विज्ञापन

पहले व्यास घाटी के लोग पैदल ही अप्रैल मई में प्रवास पर अपने मूल गांवों में जाते थे। धारचूला से गुंजी-लिपुलेख, गुंजी-ज्योलिंगकांग सड़क बनने के बाद लोगों की आवाजाही बढ़ गई है। यातायात सुविधा उपलब्ध होने से बुंदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नाबि, रौंकांग, कुटी गांवों के लोग नियमित आवाजाही कर रहे हैं। बड़ी संख्या में पर्यटक आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शनों के लिए पहुंच रहे हैं। वाहनों की आवाजाही होने से इन गांवों के परिवारों के लोग बच्चों के साथ आवाजाही कर रहे हैं।
बताया जा रहा है कि नपल्च्यू गांव के वीदन सिंह भी अपने बच्चों के साथ पूजा के लिए गांव गए थे। उन्होंने रविवार को तीन बच्चों को यात्री जीप से धारचूला के लिए भेज दिया था। तब उन्हें क्या पता था कि जिस जीप में वह अपने बच्चों को हंसी खुशी रवाना कर रहे हैं, उनके साथ कोई अनहोनी हो जाएगी। इस घटना से परिवार के लोग गहरे सदमे में हैं।
विज्ञापन

इस जीप में सवार सेवानिवृत शिक्षक तुला राम बुदियाल और उनकी पत्नी आशु देवी भी बैठी थीं। सभी को समय से धारचूला पहुंचने की उम्मीद थी लेकिन धारचूला से 55 किमी दूर यह हादसा हो गया। इस हादसे के बाद घटना स्थल पर बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए। जिसने भी यह मंजर देखा उनकी आंखें नम हो गईं। वाहन चालक और अन्य सवारों का पता नहीं चल सका है।

इंसानी जिस्म के टुकड़े नजर आए
धारचूला। पहाड़ी टूटने से हजारों टन मलबे और चट्टानों के नीचे दबी जीप का घंटों तक कोई पता नहीं चल सका। शाम के समय जीप का कुछ हिस्सा और इंसानी जिस्म के टुकड़े नजर आए।

सरकारी विभागों के अधिकारी भी फंसे
धारचूला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश में प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए इन दिनों व्यवस्थाओं को लेकर सरकारी विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों की आवाजाही भी बनी है। रविवार को हुए हादसे के कारण यातायात ठप हो गया। इसके कारण बड़ी संख्या में लोग फंस गए। सड़क खुलने की कोई उम्मीद न देखकर अधिकतर लोगों को लौटना पड़ा। इनमें पर्यटक भी शामिल थे।
दिन-रात गिरती रहतीं हैं चट्टानें
धारचूला। धारचूला-गुंजी सड़क बारिश के समय ही नहीं बल्कि साफ मौसम में भी चट्टानें दरकती रहती हैं। सड़क निर्माण के लिए विस्फोटकों से उड़ाई गई पहाड़ियों में कहां, कब चट्टान टूटकर सड़क पर गिर जाए, इसका कोई भरोसा नहीं रहता।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें