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तीन हेलिकॉप्टरों से गुंजी से 62 लोगों को किया रेस्क्यू

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पिथौरागढ़ नैनीसैनी हवाई पट्टी पर गुंजी से लाए गए लोग। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
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धारचूला/पिथौरागढ़। सड़क बंद होने से गुंजी में फंसे 20 पर्यटकों समेत 62 लोगों को बुधवार को तीन हेलिकॉप्टरों से पिथौरागढ और धारचूला लाया गया। वायु सेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से 32 लोग पिथौरागढ़ जबकि दो अन्य हेलिकॉप्टरों से 30 लोग धारचूला पहुंचाए गए।
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व्यास घाटी के सात गांवों के 50 से अधिक लोग और विभिन्न राज्यों के पर्यटक तवाघाट-लिपुलेख बार्डर रोड बंद होने से 10 दिनों से गुंजी में फंसे थे। जानकारी मिलने के बाद डीएम डॉ.आशीष चौहान के प्रयास से वायु सेना का एक चिनूक सहित दो हेलिकॉप्टर मंगलवार को पिथौरागढ़ नैनीसैनी हवाईपट्टी पहुंचे। इन दोनों हेलिकॉप्टरों के साथ ही धारचूला में तैनात एक अन्य हेलिकॉप्टर से भी रेस्क्यू किया गया।
चिनूक हेलिकॉप्टर से बुधवार को 32 लोगों को गुंजी से पिथौरागढ़ लाया गया जिसमें दिल्ली, कोटा, मुंबई, गाजियाबाद, कर्नाटक, केरल, एक हल्द्वानी और अन्य धारचूला के निवासी हैं। धारचूला के एसडीएम नंदन कुमार ने बताया कि एलएच हेलिकॉप्टर से 14 लोगों को दो उड़ानों में धारचूला लाया गया जबकि 16 लोगों को सरकार के हेलिकॉप्टर से लाया गया।
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गुंजी के प्रधान सुरेश गुंज्याल ने सेना और शासन-प्रशासन का आभार प्रकट किया। बंगलूरू की आदि कैलाश यात्री मानसा ने गुंजी में यात्रियों को सुविधा प्रदान करने के लिए प्रशासन के कार्यों की सराहना की है।
इधर राजस्व निरीक्षक जगमोहन द्विवेदी ने बताया कि गुंजी से पिथौरागढ़ लाए गए तीन पर्यटकों की व्यवस्था लोनिवि गेस्ट हाउस में की गई है जबकि 19 पर्यटकों की उनके समन्वयक ने एनएच पर स्थित होटल में ठहराया है। तीन लोगों को धारचूला भेजा गया।
38 आदि कैलाश यात्रियों को पैदल मार्ग से लाए
धारचूला (पिथौरागढ़)। बूंदी, गर्ब्यांग और गुंजी में फंसे 38 आदि कैलाश यात्रियों को एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सकुशल धारचूला पहुंचा दिया है। इन सभी यात्रियों को तीन किलोमीटर पैदल लाया गया।
तवाघाट-लिपुलेख सड़क मलघाट में मलबा आने से बंद है। इस कारण 23 और 24वें आदि कैलाश यात्रा दल के यात्री लौट नहीं पा रहे थे। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के आदेश पर धारचूला के एसडीएम नंदन कुमार के निर्देशन में नोडल अधिकारी बेड़ीनाग के तहसीलदार दिनेश सिंह के नेतृत्व में यात्रियों को एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस और प्रशासनिक कर्मियों ने तीन किमी पैदल मार्ग से जयकोट से नारायण आश्रम पहुंचाया। यहां से तहसीलदार डीके लोहनी, धारचूला कोतवाल कुंवर सिंह रावत ने वाहनों से मंगलवार देर रात यात्रियों को सकुशल धारचूला पहुंचाया। केएमवीएन धारचूला के प्रबंधक धन सिंह बिष्ट ने बताया कि अभी 29 आदि कैलाश यात्री धारचूला केएमवीएन गेस्ट हाउस में रुके हैं। मोटर मार्ग खुलते ही इन्हें यात्रा पर भेज दिया जाएगा।
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