शिक्षा विभाग ने जिले के दस प्राइवेट स्कूलों के मान्यता आवेदन इस टिप्पणी के साथ वापस कर दिए हैं कि उन्होंने मान्यता आवेदन के समय प्रस्तुत घोषणापत्र में जितनी बातों का उल्लेख किया था, उनको पूरा नहीं किया है। ऐसे स्कूलों के प्रबंधकों को एक माह का समय दिया गया है और शिक्षा का अधिकार एक्ट के अनुसार सारी व्यवस्थाएं जुटाने के निर्देश दिए हैं। यदि स्कूल प्रबंधन इन व्यवस्थाओं को नहीं कर पाता तो उनको मान्यता नहीं मिलेगी।
प्राइवेट स्कूलों के संचालन के लिए दो तरह की मान्यताएं दी जाती है। कुछ विद्यालय सीबीएसई की मान्यता लेते हैं, जबकि कुछ विद्यालय उत्तराखंड बोर्ड का पाठ्यक्रम चलाते हैं और उनकी मान्यता भी उत्तराखंड का शिक्षा निदेशालय देता है। उत्तराखंड बोर्ड से मान्यता के लिए आवेदन करने वाले दस स्कूलों के आवेदन वापस कर दिए गए हैं। बताया गया है कि मान्यता के लिए आवेदन करते समय स्कूल प्रबंधन की ओर से एक घोषणापत्र दिया जाता है, इसमें उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी दी जाती है। आवेदन मिलने के बाद खंड शिक्षा अधिकारी और उपशिक्षा अधिकारी के माध्यम से ऐसे स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया जाता है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार जुकरिया ने बताया कि गंगोलीहाट विकासखंड के 5, मुनस्यारी के 2, विण के 2 और डीडीहाट के 1 स्कूल में वह व्यवस्थाएं नहीं मिली, जिनका उल्लेख घोषणापत्र (शपथपत्र) में किया गया था। उन्होंने बताया कि आवेदन करने वाले अधिकांश स्कूलों के पास अपने भवन नहीं हैं। खेल मैदान, प्रयोगशाला की सुविधा नहीं है। कई स्कूल आरटीई के तहत जारी मानकों को पूरा नहीं करते। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों को एक महीने का समय दिया गया है और उनसे स्कूल संचालन के लिए मानक के अनुसार व्यवस्थाएं जुटाने को कहा गया है। यदि यह स्कूल निर्धारित मानक को पूरा नहीं करेंगे तो उनको मान्यता नहीं दी जाएगी और ऐसे स्कूलों को बंद करना पड़ेगा।
जिला स्तर पर बनती है कमेटी
प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने के लिए जिला स्तर पर कमेटी बनती है। इसमें जिलाधिकारी, मुख्य शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी शामिल रहते हैं। यही कमेटी स्कूलों को मान्यता देने संबंधी सारी प्रक्रिया की जांच के बाद अपनी संस्तुति शिक्षा निदेशालय को भेजती है। शिक्षा निदेशालय से ही मान्यता का पत्र प्राप्त होता है। इसके विपरीत सीबीएसई की मान्यता के मानक अलग होते हैं। सीबीएसई की टीम खुद ही व्यवस्थाओं का निरीक्षण करती है।
प्राइवेट स्कूलों की संख्या 200 से ज्यादा
जिले में सरकारी स्कूलों के बावजूद प्राइवेट स्कूलों की संख्या भी कम नहीं है। जिले में प्राइवेट स्कूलों की संख्या 200 से ज्यादा है। प्राइवेट स्कूलों में फीस का निर्धारण प्रबंध मंडल खुद करता है। यह बात अलग है कि उत्तराखंड बोर्ड की मान्यता वाले स्कूलों में बोर्ड का ही पाठ्यक्रम लागू करना पड़ता है। अब हर कस्बे में प्राइवेट स्कूल खुल चुके हैं।