जिले के वड्डा, अस्कोट, जौरासी, डीडीहाट, कनालीछीना, झूलाघाट में रामलीला जारी है। अस्कोट की रामलीला में राम, लक्ष्मण को रिझाने में नाकाम सूर्पणखा जब माता सीता पर हमलावर होती है तो भगवान राम के इशारे पर शेषावतार लक्ष्मण सूर्पणखा के नाक और कान काट देते हैं। सूर्पनखा के नाक, कान कटने पर खर-दूषण सेना के साथ पंचवटी आ धमकते हैं। खर-दूषण भगवान राम की मनोहारी छवि देखकर कह उठते हैं ‘हैरान हूं मैं देखके इस छवि को क्या करूं आती नहीं है अक्ल में बालक को क्या करूं। पागल सा बन गया हूं मैं अब लड़के क्या करू, दर्शन तो मुझको हो चुके, अब जी के क्या करूं’। भगवान राम से लड़ाई में खर-दूषण सेना सहित मारे जाते हैं। सूचना पाकर रावण कह उठता है-खर-दूषण मो सम बलवंता, तिनहीं को मारे बिन भगवंता। मुख्य अतिथि ब्लाक प्रमुख प्रशांत भंडारी ने रामलीला के लिए 70 कुर्सी प्रदान की, 30 कुर्सी और उपलब्ध कराने की घोषणा की। सूर्पणखा विमल कुमार, खर गणेश कुंवर, दूषण गोविंद सिंह, रावण के पात्र हरीश पाल थे।
डीडीहाट। डीडीहाट की रामलीला में सेतुबंधु रामेश्वरम में पुल बांधने, भगवान रामेश्वरम की स्थापना करने के बाद अंगद को दूत बनाकर लंका भेजा जाता है। अंगद-रावण संवाद का शानदार मंचन किया गया। अंगद की भूमिका अधीक्षण अभियंता नरेंद्र टोलिया, रावण की भूमिका में प्रकाश बोरा थे। ग्लोरियल हाईस्कूल की छात्राओं ने बेटी बचाओ पर नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। वक्ता मैनेजर तारा दत्त गुरुरानी ने रामलीला के विभिन्न 40 साल पुरानी जौरासी की रामलीला में सूर्पनखा का नाक, कान काटने और खर-दूषण वध की लीला का मंचन किया गया। सूर्पणखा के पात्र चंचल सिंह मस्तानी ने नृत्य से सबका दिल जीता। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष खड़क सिंह, जमन सिंह नेगी समेत तमाम लोग रामलीला के संचालन में लगे हुए हैं।