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ऊपरी रामगंगा घाटी में कई भूकटाव जोन विकसित

Tue, 11 Oct 2016 10:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नाचनी
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भूस्खलन के कारण रामगंगा में पट रहा मलबा - फोटो : अमर उजाला
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नामिक ग्लेशियर से निकलने वाली रामगंगा ने अपने दोनों किनारों में कई भूकटाव जोन तैयार कर दिए हैं। हरड़िया और रातीगाड़ का सबसे संवेदनशील इलाका इसी नदी के किनारे पड़ता है। रामगंगा के किनारे कई जगह दो से तीन मीटर तक मलबा पट गया है। नाचनी के पास नदी का कटाव रोकने के लिए बनाए गए तटबंध भी दो-दो मीटर तक मलबे से दब गए हैं। पिछले एक दशक से भूकटाव का यह क्रम शुरू हुआ था और 2013 की आपदा के बाद इसकी रफ्तार ज्यादा तेज हो गई है। हरड़िया नाले में तो बिना बारिश के भी मलबा गिरने का क्रम जारी रहता है।
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रामगंगा के किनारे बागेश्वर जिले के लीती, काभड़ी, तेजम के पास रमाड़ी, कालापैर, मुनधुरा, नाचनी के पास रातीगाड़, देकुना, रातों, टिमटिया, हरड़िया में नए भूस्खलन जोन विकसित हो गए हैं। नतीजतन भूस्खलन का सारा मलबा रामगंगा में समा रहा है और नदी के किनारों में दो से तीन मीटर मलबे की परत जमा हो गई है। ऊपरी रामगंगा घाटी के दो दर्जन से ज्यादा गांव भूकटाव के खतरे से घिर गए हैं। अभी सरकारी स्तर पर भूकटाव को रोकने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनी है।

सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता हेमचंद्र उपाध्याय का कहना है कि स्थिति लगातार खतरनाक होती जा रही है। इससे सरकारी योजनाओं को भी नुकसान पहुंच रहा है। वह कहते हैं कि भूकटाव रोकने के लिए जल्द बड़ी योजना बनाने की जरूरत है। अन्यथा मिट्टी का बड़ा हिस्सा नदी में समा जाएगा। 
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आने वाले समय में स्थिति होगी ज्यादा गंभीर
प्रसिद्ध भूवैज्ञानिक डा. केएस वल्दिया ने पिछले दिनों ऊपरी रामगंगा घाटी क्षेत्र का भ्रमण करने के बाद कहा कि मध्य हिमालय का यह इलाका सबसे ज्यादा संवेदनशील हो गया है। इसमें प्राकृतिक हलचल लगातार बनी रहती हैं। लगातार हो रहे मिट्टी के क्षरण पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्थिति ज्यादा गंभीर हो जाएगी।
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