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रामगंगा में फिर से तैयार हुआ अस्थायी पुल

Sat, 05 Nov 2016 10:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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रामगंगा में बने अस्थायी पुल से आते स्कूली बच्चे - फोटो : महेंद्र जंगपांगी
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यहां अस्याली गांव के पास रामगंगा में लोगों ने एक बार फिर से ग्रामीणों ने श्रमदान के जरिए अस्थायी पुल का निर्माण कर दिया है। यह पुल हर साल की तरह जून में नदी का जलस्तर बढ़ते ही बह जाएगा। गांव के लोग बताते हैं कि अस्थायी पुल के निर्माण की यह व्यवस्था 200 वर्षों से चली आ रही है। विडंबना है कि इस स्थान पर तीन बार झूलापुल की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन झूलापुल कभी नहीं बना। लोग नदी का जलस्तर कम होते ही अस्थायी पुल के निर्माण की तैयारी में जुट जाते हैं। इस बार श्रमदान से पुल बनाने में 10 दिन का समय लगा। लकड़ी एवं अन्य सामग्री को खरीदने में लोगों के 35 हजार रुपए खर्च हुए।
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जून में हर साल यह पुल बह जाता है। उसके बाद लोगों को नदी पार करने के लिए पांच किलोमीटर दूर घटीगाड़ झूलापुल तक जाना पड़ता है। यह बात अलग है कि अस्थायी पुल बनने से अगले छह महीने तक लोगों को थल बाजार आने, बच्चों को स्कूल जाने में सिर्फ दो किलोमीटर का ही सफर करना पड़ेगा। पुल को तैयार करने के बाद मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 200 मीटर लंबा पैदल रास्ता भी तैयार किया गया है। अस्थायी पुल निर्माण के लिए लोगों को संगठित करने वाले अस्याली गांव के युवा समाजसेवी सुरेश रजवार ने बताया कि पुल की लंबाई 70 मीटर के करीब है।

इसको मजबूती के साथ खड़ा किया गया है। उन्होंने बताया कि अस्याली गांव के साथ-साथ बल्याऊं, बल्दीजूड़ा, कनाल, कसाड़ी, कलानी, सिंटूलिया, चिफलुवा, घटीगाड़, ओखलगांव के लोगों को भी इससे सुविधा मिलेगी। उन्होंने आश्चर्य जताया कि तीन बार इस स्थान पर मंजूरी होने के बावजूद झूलापुल का निर्माण नहीं हो पाया है। शनिवार को जब पुल बनकर तैयार हुआ तो लोग काफी खुश हो गए। जगदीश चंद, मनोज चंद, राजेंद्र सामंत, गोपाल सामंत, गोविंद सिंह, करन सिंह, किशन चंद ने पुल बनाने में श्रमदान किया। इसके अलावा इन्होंने 200 मीटर कच्चा रास्ता भी बनाया।
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