थल में रामगंगा नदी में डूबा यात्री विश्राम कक्ष
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मंगलवार रात हुई मूसलाधार बारिश से बुधवार सुबह रामगंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया। जल स्तर बढ़ने से नदी के दो घाटों पर बने यात्री विश्राम कक्ष डूब गए। वन निगम के टाल में रखी 60 क्विंटल जलौनी लकड़ी बह गई। भूकटाव से गर्जिया गांव को खतरा पैदा हो गया है।
मूसलाधार बारिश से बुधवार सुबह रामगंगा नदी उफान पर आ गई। इससे पूरा घाट क्षेत्र डूब गया। डीडीहाट पेयजल योजना का फिल्टरेशन वेल सहित घाट पर बने दो यात्री विश्राम कक्ष डूब गए। रामगंगा के किनारे वन निगम की लकड़ी की टाल से लगभग 60 क्विंटल जलौनी लकड़ी बह गई। झूलापुल के बेहद नजदीक तक बह रही नदी के रुख को देखकर लोग सहम गए। नदी का जलस्तर बढ़ने से पुराने बाजार के निचले हिस्से पर काफी भू कटाव हो गया।
जमीन का काफी हिस्सा नदी में समा गया। वर्ष 2007 से इस स्थान पर लगातार भूकटाव हो रहा है। अब तक भू-कटाव रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं। नदी का जलस्तर बढ़ने पर थल के थाना प्रभारी भगवान गोस्वामी के नेतृत्व में पुलिस ने मौके पर जाकर लोगों को हाई अलर्ट किया। लगभग चार घंटे बाद रामगंगा नदी का जल स्तर घटने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
शिशु मंदिर सहित सभी स्कूलों में छुट्टी कराई
थल। बुधवार सुबह रामगंगा नदी के रुख को देखकर लोग भयभीत हो गए। खतरे को देखते हुए थल थाना पुलिस ने नदी किनारे स्थित सभी स्कूलों में छुट्टी करा दी।