इस देश में स्वच्छ गंगा, स्पर्श गंगा, स्वच्छ भारत जैसे कई अभियान चल रहे हैं, लेकिन यह जानकर आश्चर्य होगा कि पहाड़ की नदियों के तटों को साफ करने के लिए न तो कोई अभियान चला है और न इसके लिए कोई प्रयास ही हुआ है। थल में रामगंगा के घाट पर बिखरी गंदगी से यह स्पष्ट हो जाता है कि इन नदियों को देखने वाला कोई नहीं है। नदियों की गंदगी हर सीजन में एक सी रहती है। बारिश के मौसम में नदी कुछ गंदगी को बहा ले जाती है, लेकिन बाद में गंदगी के ढेर जमा होने लगते हैं।
थल में रामगंगा के तट पर आसपास के 50 गांवों से लोग शवदाह के लिए आते हैं। इसके अलावा नदी में खास पर्वों पर पवित्र स्नान भी होता है, लेकिन नदी के किनारे पसरी गंदगी से लोगों को नदी में नहाने की इच्छा नहीं होती। व्यापार संघ कभी कभार नदी के तट की सफाई के लिए अभियान चलाता है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण व्यापार संघ हमेशा यह काम कर पाने की स्थिति में नहीं रहता। व्यापार संघ अध्यक्ष बलवंत सत्याल का कहना है कि बार-बार सफाई अभियान चलाने के बजाए इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि लोग नदी के किनारे गंदगी न फैलाएं।
लोगों को इस बात के लिए भी जागरूक किया जा रहा है कि वह शवदाह के बाद जली लकड़ियों, कपड़ों को तत्काल हटा दें। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी स्तर पर या अन्य किसी संस्था ने नदी की सफाई के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया। नदी के किनारे की गंदगी पानी में घुलती रहती है। इससे थल में रामगंगा का पानी भी प्रदूषित हो गया है। इस समस्या का फिलहाल कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है।