बारिश से शुक्रवार रात मिलम ग्लेशियर से निकलने वाली गोरी नदी उफान पर आ गई है। बंगापानी तहसील मुख्यालय के साथ ही छोरीबगड़, भदेली, देवीबगड़ में नदी जबरदस्त भूकटाव कर रही है। इससे बंगापानी तहसील भवन खतरे की जद में आ गया है। मदकोट के छोरीबगड़ क्षेत्र में कई चेकडैम बह गए हैं। नदियां खतरे के निशान के आसपास बह रही हैं। नदी उफान में आने से लोगों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
नदी के तेज बहाव से छोरीबगड़, भदेली, देवीबगड़ में जबरदस्त भूकटाव हो रहा है। बंगापानी के तहसील भवन के पास तक की जमीन नदी में समा गई है। खतरे के कारण तहसील कार्यालय को जुलाई में ही अन्यत्र शिफ्ट कर दिया गया था। छोरीबगड़ में जमीन का बड़ा हिस्सा गोरी नदी में समा गया है। छोरीबगड़ में 5 तटबंध बहने की सूचना है। इनमें एक तटबंध हाल में ही बनाया गया था। भदेली, देवीबगड़ क्षेत्र में भी नदी ने तांडव मचा रखा है।
मदकोट में भी भूकटाव हो रहा है। लोग अभी दो जुलाई की आपदा से उबरे नहीं हैं कि शुक्रवार एवं शनिवार को हुई बारिश के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने और भूकटाव होने से लोग दहशत में आ गए हैं। मुनस्यारी के एसडीएम केएन गोस्वामी से संबंधित विभागों से सक्रिय रहकर क्षति का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने लोगों से नदी किनारे सावधानी पूर्वक आवागमन करने को कहा है।
उमचिया, सुमदुम, तीजम के हालात सामान्य नहीं
पिथौरागढ़। दो जुलाई की आपदा के बाद से धारचूला तहसील के उमचिया, सुमदुम, तीजम के हालात सामान्य नहीं हुए हैं। लोगों को जान हथेली में रखकर आवागमन करना पड़ा रहा है। जुलाई की अतिवृष्टि में तेजम क्षेत्र को जोड़ने वाला मोटर पुल और पैदल पुल बह गया था। तब से अब तक वहां यातायात के साधन बहाल नहीं हुए हैं। लोग उफनाते नाले में पेड़ डालकर आवागमन कर रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता गणेश दानू और अनिल बिष्ट ने बताया कि कई स्थानों पर आवागमन जानलेवा बना है। डेढ़ माह बाद भी इलाके के हालात सामान्य नहीं हुए हैं। कहा कि लोगों को मुख्य मार्ग से 15 किमी पैदल चलना पड़ रहा है।
कुलथम के छह परिवारों ने छोड़ा घर
पिथौरागढ़। दशकों से आपदा का दंश झेल रहे मुनस्यारी के कुलथम गांव पर शुक्रवार की बारिश कहर बनकर टूटी है। भूस्खलन के कारण छह मकान खतरे की जद में आ गए हैं। 5 परिवारों ने स्कूलोें में और एक परिवार ने ढीलम गांव में शरण ले रखी है। कुल्थम निवासी विशन सिंह ने बताया कि जरूरी सामान के लिए तीन किमी घूमकर जाना पड़ रहा है। बताया कि कुलथम गांव वर्ष 1994 से आपदा का दंश झेल रहा है। वर्ष 1994 में 11, वर्ष 1999 में 5 परिवार और 2007 में 17 परिवार आपदा से प्रभावित हुए। शेष बचे छह परिवारों ने भी शुक्रवार की आपदा के बाद घर छोड़ दिए हैं। गांव में हर तरफ दरारें पड़ी हैं। गांव रहने लायक नहीं रह गया है। विस्थापन की मांग सरकार पूरी नहीं कर रही है।
नदियों का जलस्तर मीटर में
नदी बह रही खतरे का निशान
महाकाली धारचूला 889.70 890.0
गोरी जौलजीबी 605.65 607.80
गोरी मदकोट 1212.10 1215.10
सरयू चमगाड़ 447.40 453.0
24 घंटे में कहां कितनी बारिश
पिथौरागढ़- 4 एमएम
गंगोलीहाट 0.5 एमएम
बेड़ीनाग 0 एमएम
डीडीहाट 11 एमएम
धारचूला 54.0 एमएम
मुनस्यारी 72 एमएम