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Pithoragarh News: बारिश की बूंदों बढ़ाई बेचैनी, गोरी की गर्जना में खोया गांवों का सुकून

Thu, 09 Jul 2026 10:58 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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बंगापानी/मुनस्यारी। मानसून की दस्तक के साथ गोरी और सभी प्रमुख नदियां फिर उफान पर हैं। नदियों के किनारे बसे गांवों के लोगों के लिए बारिश राहत नहीं बल्कि भय लेकर आई है। वर्षों से कटाव और भूस्खलन की मार झेल रहे आपदा प्रभावितों की चिंता बढ़ने लगी है।
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मानसूनी बारिश के बीच संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने गोरी और मंदाकिनी नदी किनारे बसे देवीबगड़, उमड़गाड़ा, छोरीबगड़, भदेली और तल्ला दुम्मर गांवों का दौरा कर वहां के हालात का जायजा लिया। गोरी नदी से करीब 50 मीटर ऊपर स्थित उमड़गाड़ा गांव में रहने वाली सुनपति देवी ने बताया कि नदी का जलस्तर बढ़ते ही पिछली आपदाओं की भयावह यादें ताजा हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में नदी के कटाव से उनकी उपजाऊ जमीन बह गई और भूस्खलन से घरों में दरारें पड़ गईं। अब फिर कटाव शुरू हो गया है और रातभर नदी की गर्जना के कारण नींद तक नहीं आती।
उमड़गाड़ा के ही नारायण राम ने कहा कि नदी किनारे अब तक तटबंध नहीं बनने से गांव पर फिर आपदा का खतरा मंडरा रहा है। वहीं, छोरीबगड़ के नारायण टोलिया ने बताया कि वर्ष 2013 की आपदा में गोरी नदी के कटाव से गांव की जमीन बह गई थी और उसके बाद हुए भूस्खलन से 10 से अधिक घर क्षतिग्रस्त हो गए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते तटबंध बनाए गए होते तो नुकसान काफी हद तक रोका जा सकता था।
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भदेली, तल्ला दुम्मर और देवीबगड़ के 80 से अधिक परिवारों ने भी इसी तरह की चिंता जताई। उनका कहना है कि सुरक्षित विस्थापन और तटबंध निर्माण की मांग वर्षों से लंबित है जिसके चलते वे आज भी खतरे के साए में जीवन बिताने को मजबूर हैं।

2013 की आपदा ने भदेली में बरपाया था कहर
भदेली गांव वर्ष 2013 की आपदा में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में शामिल रहा। गोरी नदी के उफान से जौलजीबी-मुनस्यारी सड़क का लगभग 500 मीटर हिस्सा नदी में समा गया था। कई परिवारों की कृषि भूमि और मकान तबाह हो गए, जबकि 13 परिवारों को लंबे समय तक जंगल में टेंट लगाकर रहना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि तब से लेकर आज तक गोरी नदी का कटाव लगातार जारी है लेकिन तटबंध निर्माण का प्रस्ताव अब भी फाइलों तक सीमित है।

ग्रामीणों की पीड़ा
हर साल आने वाली आपदा हमें गहरे जख्म दे जाती है। इसका प्रमुख कारण गोरी नदी का बहाव है। यदि तटबंध बनते तो भूकटाव रुकता और आपदा का खतरा कम होता। -नारायण टोलिया, छोरीबगड़
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हर साल मानसूनकाल में हमारी नींद खो जाती है। पूरी रात नदी की पहरेदारी करना मजबूरी बन जाता है। यदि सुरक्षा के इंतजाम होते तो खतरा भी कम हो जाता। -नारायण राम, उमड़गाड़ा
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बारिश शुरू होते ही हमें अपने परिवार और गांव की चिंता सताने लगती है। हमें आपदा जैसे हालात से कब मुक्ति मिलेगी। न तो सुरक्षित विस्थापन हो रहा है और ना ही गोरी नदी में सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं। -सुनपति देवी, उमड़गाड़ा

गोरी सहित अन्य नदियों के किनारे कई स्थानों पर तटबंधों का निर्माण किया गया है। कुछ स्थानों पर तटबंध बनने हैं इसका प्रस्ताव भेजा गया है। कुछ आपदा प्रभावितों का विस्थापन भी होना है। इसकी प्रक्रिया जारी है। -भूपेंद्र महर, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, पिथौरागढ़

भदेली सहित अन्य स्थानों पर तटबंध बनाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलते ही तटबंध निर्माण किया जाएगा। -संजीव यादव, सहायक अभियंता, सिंचाई विभाग, धारचूला
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