पिथौरागढ़। सीमांत जिले में समय पर बारिश नहीं होने से फसलों पर 15 से 20 फीसदी तक असर पड़ा है। सबसे अधिक गेहूं की फसल प्रभावित हुई है। अभी टीम नुकसान का जायजा लेने में जुटी है। अलबत्ता खेतों में गेहूं आदि की फसल नाममात्र ही दिख रही है।
वर्ष 2022 में नवंबर, दिसंबर महीने सूखे रहे। इस वर्ष जनवरी और फरवरी में बारिश नहीं हुई। जिले के आठों विकास खंडों में 18 हजार हेक्टेयर में गेहूं की फसल बोई जाती है। गेहूं की बढ़वार के लिए जनवरी में होने वाली बारिश और नमी बेहतर मानी जाती है। इससे दाना भी अच्छा लगता है। इस बार जनवरी-फरवरी में बारिश नहीं होने से कई स्थानों पर बीज ही नहीं उगा जहां पौध हुई भी तो पीली पड़ गई।
मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा ने बताया कि डीएम की अध्यक्षता में राजस्व, कृषि, उद्यान और पशुपालन विभाग की टीम विकास खंडों में फसलों के नुकसान का जायजा ले रही है। अभी डीडीहाट और कनालीछीना विकासखंडों की प्राथमिक रिपोर्ट मिली है। इसमें 15 से 20 फीसदी तक फसलों को नुकसान हुआ है। अन्य विकास खंडों में सर्वे कार्य चल रहा है। अब घाटी वाले स्थानों पर फसल पकने को है। ऐसे में रोज बिगड़ रहे मौसम से किसानों को ओलावृष्टि का भय सता रहा है।
सीमांत जिले में बोई गई फसल
फसल मात्रा (हेक्टेयर में)
गेहूं 18000
जौ 4100
चना 80
मटर 250
मसूर 4500
लाही सरसों 900