पिथौरागढ़। सीमांत जिले में बारिश नहीं होने से रबी की फसल बर्बाद हो गई है। इससे किसान परेशान हैं। डीएम ने फसलों के प्राथमिक सर्वे के लिए निगरानी समिति का गठन कर दिया है। यह समिति नुकसान का आकलन करेगी।
जिले में पिछले चार माह से बारिश नहीं हुई है। इस कारण जिले भर में 27 हजार 830 हेक्टेयर में बोई गई गेहूं, चना, मसूर, जौं की फसलें सूखने लगी हैं। किसानों ने सरकार से खेती को सूखाग्रस्त घोषित कर मुआवजा देने की मांग की है। डीएम ने सूखे से फसलों के आकलन के लिए निगरानी समिति का गठन कर दिया है जिसमें उद्यान, कृषि, राजस्व, पशुपालन विभाग शामिल किया है जो जिले भर में सूखे का आकलन कर रिपोर्ट डीएम को सौपेंगे।
बता दें कि अक्तूबर 2021 में जिले भर में 310.93 एमएम बारिश हुई थी। वर्ष 2022 में सिर्फ 179.32 एमएम बारिश हुई। नवंबर 2021 में 4.70 एमएम बारिश हुई थी। नवंबर 2022 में सिर्फ 1.70 एमएम बारिश हुई। इस वर्ष दिसंबर से अब तक सूखे जैसे हालात बने हैं।
रबी की फसल
फसल- हेक्टेयर
जौं- 4100
चना- 80
मटर-250
मसूर- 4500
लाही सरसों- 900
बारिश नहीं होने से फसलें पीली हो गई हैं। सरकार को क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। - नारायण सिंह बोरा, किसान।
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बारिश नहीं होने से फसलों के साथ-साथ बागवानी को भी नुकसान पहुंचा है। खेतों में नमी नहीं होने के कारण फसलों की ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। -मदन सिंह, किसान।
सूखे के आकलन के लिए निगरानी समिति का गठन कर दिया है जो आकलन कर डीएम को रिपोर्ट सौंपेगी। -ऋतु टम्टा, मुख्य कृषि अधिकारी पिथौरागढ़।