मुनस्यारी में डीएम के समक्ष अपनी बात रखते पातों के पूर्व प्रधान मनोहर सिंह।
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गांवों के बीच विवाद को देखते हुए जिला प्रशासन ने कीड़ा जड़ी के दोहन पर रोक लगा दी है। इतना ही नहीं प्रशासन ने यहां धारा 144 लगाने का भी आदेश जारी किया है।
राजरंभा और रालम तोक में कीड़ा जड़ी (यारसागंबू) के दोहन को लेकर बुई और पातों के ग्रामीणों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। डीएम डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने रविवार को बुई और पातों के ग्रामीणों से बातचीत भी की। इस बातचीत का कोई हल नहीं न निकलने पर डीएम ने राजरंभा और रालम तोक में कीड़ा जड़ी के दोहन पर रोक लगा दी है। डीएम ने उपजिलाधिकारी आरसी गौतम को बुई, पातों का विवाद सुलझने तक रालम और राजरंभा तोकों में धारा 145 लगाने के निर्देश दिए हैं।
कीड़ा जड़ी के दोहन से जुड़ा यह व्यापार इस बार कुछ हद तक पटरी पर आने के आसार हैं। कारण यह भी है कि अभी तक प्रशासन यहां कीड़ा जड़ी के दोहन का अधिकार तो देता है लेकिन गांव के लोग इस कीड़ा जड़ी को बेच नहीं सकते थे। इस बार भेषज संघ को यह कीड़ा जड़ी खरीदने का अधिकार दिया गया है। पड़ोसी राष्ट्र नेपाल में कीड़ा जड़ी का दोहन और इससे जुड़ा व्यवसाय वैध है और इस वजह से इस क्षेत्र से नेपाल के लिए कीड़ा जड़ी की तस्करी भी होती है। वहीं, बुई और पातों में पिछले साल ही कीड़ा जड़ी तक के पहुंच मार्ग को लेकर खासा विवाद हुआ था। एक गांव के लोगों ने दूसरे गांव के लोगों को रास्ता देने से मना कर दिया था और इस वजह से कई लोग नए रास्ते से तोकों तक पहुंचे थे। यह विवाद अभी तक सुलझ नहीं पाया।