मुनस्यारी (पिथौरागढ़)। दुर्गम पर्वतीय गांव टांगा के लोग बीते दस वर्षों से अपने हिस्से का पुल बनने की आस में जी रहे हैं। नदी के दोनों ओर सड़क बनने के बावजूद आज तक कोई मोटर ब्रिज नहीं बनाया गया। आवाजाही की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए लगाई गई गरारी (रोपवे) भी अब जवाब दे चुकी है। हाल ही में एक महिला इसी टूटी गरारी से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गई। इस मामले में क्षेत्रीय लोग सरकारी विभागों की अनदेखी और सिस्टम की उदासीनता पर सवाल उठा रहे हैं।
पिछले कई सालों से गरारी ही ग्रामीणों की इकलौती लाइफलाइन रही है लेकिन अब यह जानलेवा महसूस होने लगी है। रोजाना स्कूली बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं और मरीज इसी के सहारे जान जोखिम में डालकर आवागमन करते हैं। ग्रामीण कहते हैं कि जब तकनीकी जांच के बाद भी गरारी नहीं सुधरी और हादसा हुआ तो यह सीधा विभागीय कर्मचारियों और अधिकारियों की विफलता है। उनका कहना है कि सरकारी अधिकारियों ने गरारियों की तकनीकी जांच का दावा तो किया मगर हकीकत में कुछ भी दुरुस्त नहीं हुआ। नतीजा यह हुआ कि एक महिला अस्पताल में जिंदगी से जूझ रही है और पूरा गांव चिंतित है।
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पुल निर्माण की मांग और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर पुल निर्माण शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे। साथ ही घायल महिला को मुआवजा देने और गरारी की जवाबदेही तय करने की भी मांग की गई है।
सवाल
जब सड़क दोनों तरफ बन चुकी है तो एक दशक में पुल क्यों नहीं बन पाया? - जगत मर्तोलिया, पूर्व जिला पंचायत सदस्य