जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव/सिविल जज सीनियर डिवीजन रीतेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया है कि 10 अप्रैल 2015 को सुप्रीमकोर्ट के लक्ष्मी बनाम भारत संघ वाद में पारित आदेश के क्रम में उच्चतम न्यायालय ने दिशानिर्देश जारी किए हैं। आदेश के तहत अम्लीय हमले (एसिड अटैक) की पीड़िता महिला का सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज किया जाएगा। बताया कि इलाज करने से मना करने पर संबंधित को एक वर्ष तक की सजा हो सकती है।
पीड़ित महिला को पीड़ित होने का प्रमाणपत्र जारी किया जाएगा और पीड़िता को प्रतिकर देने का निर्णय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का कंपनसेशन बोर्ड लेगा। पीड़िता को कम से कम तीन लाख रुपये प्रतिकर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 357 ए में अपराध पीड़ित को प्रतिकर दिलाए जाने का प्रावधान किया गया है, जिसके अनुपालन में उत्तराखंड सरकार ने अपराध से पीड़ित सहायता योजना 2013 बनाई, जो प्रदेश में 31 दिसंबर 2009 से लागू हुई। इसके तहत एसिड अटैक, यौन उत्पीड़ितों को केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय निकायों द्वारा संचालित अस्पतालों के साथ ही निजी अस्पतालों में निशुल्क उपचार करने और पुलिस को घटना की सूचना देने का प्रावधान है।