पिथौरागढ़ कृषि विज्ञान केंद्र में संरक्षित खेती की जानकारी लेते किसान
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कृषि विज्ञान केंद्र गैना में आयोजित किसान दिवस में किसानों से संरक्षित खेती अपनाने की अपील की गई। किसानों को संरक्षित खेती में मिट्टी की जांच, फसलों को कीटों से बचाने, उपचारित बीजों का प्रयोग करने, पोषक तत्वों की कमी होने पर जमीन में खाद डालने की जानकारी दी गई। साथ ही पशुपालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, मछली और मशरूम उत्पादन के प्रति प्रेरित किया गया।
कृषि वैज्ञानिकों ने कहा कि कुछ समय से किसान मिट्टी की जांच एवं उपचारित बीजों का प्रयोग करने लगे हैं। इससे फसलों का उत्पादन बढ़ रहा है। साथ ही फसलों को कीटाणु से कम नुकसान हो रहा है। आमतौर पर प्याज और टमाटर पर कीटों का ज्यादा असर होता है। इसके अलावा कम या अधिक बारिश में गेहूं की फसल भी खराब होने लगती है। नाबार्ड के उपमुख्य महाप्रबंधक केवी दुआ ने कहा कि किसानों को नकदी फसलों की तरफ ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डा. निर्मला भट्ट ने कहा कि मशरूम उत्पादन की ओर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। मशरूम को बाजार में बेचने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आती और ज्यादा पौष्टिक तत्वों वाला होने के कारण इसकी मांग भी बहुत ज्यादा रहती है। इस दौरान नाबार्ड के जिला प्रबंधक पुनीत नागर, आजीविका परियोजना के निदेशक कुलदीप बिष्ट, जीवन लाल समेत 60 किसान मौजूद थे।