कुमाऊं मंडल विकास निगम ने कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग के पैदल पड़ावों पर सौर ऊर्जा से संचालित गीजर लगाने का प्रस्ताव विदेश मंत्रालय के सामने रखा है। पैदल पड़ावों पर कहीं पर भी बिजली की सुविधा नहीं है। यात्रा पड़ावों पर हट्स बनकर तैयार होने से वर्ष 2018 की यात्रा के दौरान घोड़े वालों और मजदूरों को आवास की समस्या नहीं होगी। कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारी के लिए दिल्ली में विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भाग लेकर लौटे केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि अगली बार यात्रा ज्यादा सुविधा संपन्न हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि विदेश मंत्रालय ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि पैदल रास्तों की मरम्मत अप्रैल तक हर हाल में कर ली जाए। इस समय गर्ब्यांग से आगे हो रहे सड़क निर्माण के कारण पैदल रास्ते कई जगह टूट गए हैं। इन रास्तों की मरम्मत समय पर करनी होगी। कैलाश मानसरोवर यात्रा जून में शुरू होगी। उससे पहले विदेश मंत्रालय एक और बैठक करेगा।
साथ ही रास्तों और पड़ावों की स्थिति की जानकारी हासिल करेगा। कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए सभी दिशा-निर्देश विदेश मंत्रालय देता है, जबकि यात्रियों के आवागमन, भोजन और आवास की व्यवस्था कुमाऊं मंडल विकास निगम करता है।
यात्री शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव रखा
कुमाऊं मंडल विकास निगम अब तक कैलाश मानसरोवर यात्रियों से 35 हजार रुपये प्रति यात्री के हिसाब से शुल्क लेता है। अगली बार के लिए शुल्क में वृद्धि का प्रस्ताव विदेश मंत्रालय के सामने रखा गया है। केएमवीएन के महाप्रबंधक टीएस मर्तोलिया ने बताया कि निगम ने अपनी ओर से प्रति यात्री शुल्क 48 हजार रुपये करने का प्रस्ताव दिया है।
अगले साल भी वाहन सुविधा संभव नहीं
कैलाश मानसरोवर यात्रियों को वर्ष 2018 की यात्रा के दौरान नारायणआश्रम से लिपुलेख तक का सफर पैदल तय करना पड़ेगा। अभी गर्ब्यांग से गुंजी तक सड़क पहुंचने में काफी समय लगने वाला है। इस समय सड़क निर्माण का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन अगले साल जून तक सड़क का निर्माण पूरा होने की उम्मीद नहीं है। यात्रियों को दिल्ली से नारायणआश्रम तक वाहनों से ले जाएगा। उसके बाद का सफर पैदल होगा।