विकास प्राधिकरण को जनविरोधी कानून बताते हुए संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले जुलूस निकाला गया। इस दौरान लोगों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। बाद में उप जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा गया।
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मंगलवार को समिति के बैनर तले दर्जनों लोग रिमझिम बारिश की फुहारों के बीच पालिका स्थित रामलीला मैदान में एकत्र हुए। यहां से सिमलगैर, नया बाजार, केमू स्टेशन होते हुए जुलूस टकाना स्थित रामलीला मैदान में पहुंचा। यहां हुई सभा में वक्ताओं ने प्राधिकरण को पर्वतीय क्षेत्र की जन भावनाओं के विपरीत बताया। उन्होंने राज्यपाल को भेजे ज्ञापन में कहा है कि सीमांत जनपद पलायन से ग्रसित है ऐसे में प्राधिकरण के कानून यहां लागू नहीं हो सकते हैं। जब तक किसी शहर में मास्टर प्लान लागू न किया जा रहा हो वहां पर प्राधिकरण की अवधारणा ही निर्मूल है।
पहाड़ की भौगोलिक स्थिति के सापेक्ष प्राधिकरण संबंधी कानून का अनुपालन किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। प्राधिकरण जहां पर लागू होता है वहां सड़क, बिजली, पानी, सीवेज की सुविधा हर मकान तक होनी आवश्यक है। सीमांत जनपद में यह सब होना जटिल प्रक्रिया है जो किसी भी स्थिति में संभव नहीं है। ज्ञापन में कहा गया है कि पलायन पर वास्तविक रूप से शासन और सरकार गंभीर है तो जन विरोधी कानून को समाप्त करना ही एकमात्र विकल्प है। इस मौके पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहन चंद्र भट्ट, व्यापार संघ अध्यक्ष शमशेर महर, चंद्रशेखर कापड़ी, चंद्रशेखर पुनेड़ा, प्रेम सिंह बिष्ट, एड. निर्मल चौधरी, अनिल डब्बू, राजेश तिवारी, अजय बोहरा, विनोद मतवाल, गोविंद कफलिया, जगदीश कलौनी, मुकेश पंत, मनोज जोशी समेत दर्जनों महिलाएं, अधिवक्ता आदि मौजूद रहे।