पिथौरागढ़। सिंचाई विभाग भारत-नेपाल का सीमांकन करने वाली काली नदी से हो रहे भू-कटाव को रोकने के लिए 22 स्थानों पर तटबंध का निर्माण करेगा। इसके लिए विभाग ने 300 करोड़ का प्रस्ताव सरकार को भेज दिया है। सरकार से स्वीकृति मिलते ही तटबंध निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा। यहां के लोग लंबे समय से तटबंध निर्माण की मांग कर रहे हैं।
कालापानी से निकलने वाली काली नदी का सहायक नदियों से मिलने के बाद प्रचंड वेग हो जाता है। ग्लेशियरों के पिघलने के कारण इसका वेग हमेशा बढ़ता रहता है। काली नदी के तीव्र वेग के कारण कालापानी से जौलजीबी तक जगह-जगह भू-कटाव हो रहा है। इससे मानव बस्तियों के ऊपर खतरा बढ़ गया है। इसी को देखते हुए सिंचाई विभाग ने जौलजीबी से गुंजी तक 22 ऐसे स्थान चयनित किए हैं। जिनमें लगातार भू-कटाव हो रहा है। विभाग ने भू-कटाव को रोकने के लिए सरकार को 300 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है।
शासन से स्वीकृति मिलते ही तटबंध बनाने का कार्य शुरू हो जाएगा। बता दें कि जिन 22 स्थानों को चयनित किया गया है वहां रहने वाले लोग लंबे समय से तटबंध बनाने की मांग कर रहे हैं। तटबंध निर्माण के बाद भू-कटाव का खतरा कम हो जाएगा। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता विकास श्रीवास्तव का कहना है कि शासन से स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
तटबंध बनाने में नेपाल आगे
पिथौरागढ़। काली नदी किनारे नेपाल ने अपने क्षेत्र में कई स्थानों पर मजबूत तटबंध बना दिए हैं। जिस कारण काली नदी का बहाव भारतीय क्षेत्र को अधिक बढ़ा है। जिससे भारतीय भू-भाग काली नदी में समाता जा रहा है। तटबंध निर्माण के बाद ऐसे स्थानों की सुरक्षा हो पाएगी।
इन स्थानों पर प्रस्तावित हैं तटबंध
सेना क्षेत्र गुंजी, सेना क्षेत्र कुटी, सीतापुल, टैक्सी स्टैंड धारचूला, आर्मी कैंप-1 , आर्मी बटालियन कैंप, मल्ला हाट, तल्ला हाट, निंगालपानी, गोठी, कालिका, मल्ला सीपू, नया बस्ती, छारछुम, बलुवाकोट, घट्टाबगड़, ढूंगातोली,किमखोला, मल्ला किमखोला, जौलजीबी इंटर कॉलेज, दूती, गलाती ।
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