जैंती गांव में किसानों की करीब 80 नाली भूमि में बोई गई आलू की फसल मय जमीन के अतिवृष्टि की भेंट चढ़ गई है। फसल की खुदाई के वक्त मची तबाही से ग्रामीण बेहद परेशान हो गए हैं। उन्होंने बताया कि इसी आलू से उनकी आजीविका चलती थी। ग्रामीणों ने फसल और जमीन के नुकसान की भरपाई की मांग की है।
अमर उजाला संवाददाता शुक्रवार को गांव पहुंचे तो ग्रामीण रंजीत सिंह रावत, राजेंद्र सिंह, गोकर्ण सिंह ने बताया कि एक जुलाई को हुई मूसलाधार बारिश के बाद अगले दिन राजस्व विभाग की टीम नुकसान का जायजा लेने पहुंची। बताया कि दो जुलाई को हुई भारी बारिश के बीच बरसाती नाले का रुख गांव की ओर हो गया।
नाला पंचायत घर को क्षतिग्रस्त करते हुए आलू के खेतों में समा गया। इससे खेत तबाह हो गए। उन्होंने बताया कि आलू की खुदाई का समय हो गया था, लेकिन ऐन वक्त पर मौसम की मार ने उनकी कमर तोड़ दी। बरसाती नाले ने तामाघर में दो मछली तालाबों को भी ध्वस्त कर दिया।
बीआरओ की गलती का खामियाजा भुगता
मुनस्यारी। रांथी गांव में गोविंद राम का मकान खतरे की जद में आ गया है। इसके चलते परिवार को जीजीआईसी नमजला में शिफ्ट कर दिया है। मुनस्यारी-जौलजीबी मार्ग पर बीआरओ द्वारा दीवारें नहीं लगाने, स्कबर, कलमठ चोक होने के कारण अधिकतर स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। गोविंद राम ने बताया कि उन्होंने पहले ही बीआरओ से उनके मकान के ऊपर कलमठ नहीं बनाने की मांग की थी। लिखित आश्वासन के बावजूद बीआरओ ने कलमठ बना दिया। इसके चलते उन्हें अपने घर से शिफ्ट होना पड़ रहा है।
पीड़ितों को नहीं मिला राशन
मुनस्यारी। रांथी गांव के राजकीय हाईस्कूल नमजला में चंद्रराम, भुवन राम, लक्ष्मण राम, देव राम, विजय राम के परिवारों ने शरण ली है। बहादुर राम के परिवार के छह सदस्यों को आश्रम पद्धति स्कूल में शरण दी है। राजकीय हाईस्कूल नमजला और जीजीआईसी में बिजली की कोई व्यवस्था नहीं है। इन तीनों जगहों पर शरण लिए आपदा पीड़ितों को चौथे दिन भी प्रशासन की ओर से राशन उपलब्ध नहीं कराया गया। शुक्रवार को भाजपा की आपदा मॉनीटरिंग टीम ने प्रभावितों से मुलाकात की। टीम ने एसडीएम से उक्त परिवारों के लिए राशन और बिजली की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया। टीम में जगत मर्तोलिया, गोकर्ण मर्तोलिया, मनोहर दरियाल, किशन निखुर्पा, दीवान जेष्ठा, यशोदा पांगती, बसंती जोशी, यशवंत बृजवाल आदि शामिल रहे।
चौना से पैदल मदकोट पहुंची बारात
मदकोट। मुनस्यारी-मदकोट सड़क बंद होने से एक वनडे बारात आठ किमी पैदल चलकर चौना पहुंची। चौना के पीयूष पापड़ा की बारात शुक्रवार को मदकोट पहुंची। चौना से सुबह चले बाराती अपरान्ह ढाई बजे मदकोट पहुंचे। यहां खुशबू पापड़ा के संग पीयूष ने सात फेरे लिए। पैदल चलने के बावजूद बारातियों में खासा उत्साह था।
कई गांव की बिजली अब भी गुल
मदकोट। क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के चलते अभी आधा दर्जन से अधिक गांवों की बिजली गुल है। मदकोट कस्बे में तो बिजली आपूर्ति सुचारु कर दी गई है, लेकिन बोना, तोमिक, वल्थी, गोल्फा, निरतोली, गैला, राफ्ती में बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं हुई है। इन गांवों में अगले दो दिन में आपूर्ति सुचारु होने की उम्मीद है।