छिपलाकुंड से निकाला गया सिक्कों का ढेर
- फोटो : अमर उजाला
चार हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित छिपलाकेदार के दौरे पर गए युवाओं का दल वहां पॉलिथीन और प्लास्टिक देखकर हैरान हो गया। वहां पवित्र छिपलाकुंड को हजारों सिक्के और चढ़ावे की सामग्री से पाट दिया गया है। छिपलाकेदार में लोग बच्चों के उपनयन संस्कार, खास मौकों पर पूजा के लिए जाते हैं। यह लोग सारी गंदगी परिसर में ही फैला देते हैं। वहां अगरबत्ती के ही सैकड़ों रैपर जगह-जगह बिखरे पड़े थे।
युवा समाजसेवी जीवन ठाकुर के नेतृत्व में चार युवाओं के दल ने एक से 22 मई तक छिपलाकेदार ट्रैक, छिपलाकुंड में सफाई अभियान चलाया। जीवन ने बताया कि छिपलाकुंड अब कचरे में भर गया है। युवाओं ने जब कुंड की सफाई की तो वहां से हजारों सिक्के निकले। इनमें कुछ सिक्के ऐसे हैं जो अब प्रचलन से बाहर हो गए हैं। आस्था के वशीभूत लोगों ने कुंड में नोट भी चढ़ा दिए थे।
जीवन ठाकुर के साथ गए युवा गोपाल सिंह, तारा सिंह और राजेंद्र सिंह ने स्थानीय लोगों की मदद से छिपलाकुंड की सफाई की। छिपलाकेदार मंदिर में फैली गंदगी को हटाने का प्रयास किया। वहां आ रहे लोगों को सफाई का महत्व समझाते हुए कहा कि इतनी दूर पॉलिथीन लाने की जरूरत क्या है। पूजा की सामग्री को कपड़े के थैले में लाएं और थैला अपने साथ घर को ले जाएं। यदि लोगों का रवैया नहीं बदला तो दूरस्थ इलाकों में स्थित पवित्र स्थल भी प्रदूषण की चपेट में आ जाएंगे।
यारसागंबू खोजने वाले भी पहुंच गए
यारसागंबू खोजने वालों के लिए छिपलाकेदार के बुग्याल सबसे ज्यादा मुफीद हैं। यह लोग रात के समय जंगली जानवरों का शिकार करते हैं और उनको बुग्यालों में ही पकाकर खा जाते हैं। बुग्यालों में गंदगी फैलाने में इन लोगों का हाथ ज्यादा रहता है। बताया गया है कि छिपलाकेदार के बुग्यालों में इस समय करीब 2500 लोग यारसागंबू की खोज में जुटे हैं। पैदल रास्तों में केवल इन्हीं लोगों की आवाजाही नजर आती है।