पिथौरागढ़ कलक्ट्रेट में नारायणी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं ने लगाई जैविक रंगों को प्रदर
पिथौरागढ़। उत्तराखंड में होली का सुरूर छाने लगा है। पिथौरागढ़ में होली का रंग अभी से लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा है। पिथौरागढ़ की महिला स्वयं सहायता समूह ने बुरांश, हल्दी के जैविक रंग बनाए हैं ताकि लोग सुरक्षित तरीके हर्बल रंगों से होली खेल सकें।
नारायणी महिला स्वयं सहायता समूह ऐंचोली ने बुरांश के फूल, गेंदा, गुलाब, पालक, हल्दी, चुकंदर, कपूर के अलावा अन्य प्राकृतिक उत्पादों से हर्बल रंग तैयार किया है। महिला सहायता समूह से जुड़ी रेनू जोशी का कहना है कि रंग बनाने से लेकर पैकिंग तक सारा काम खुद सहायता समूह की महिलाएं करती हैं। मार्केटिंग का काम भी महिलाएं कर रही हैं। इस होली के सीजन में वह 10 किलो शुद्ध जैविक होली का रंग बेच चुकी हैं। इन जैविक रंगों का दाम बाजार में मिलने वाले अन्य रंगों के बराबर ही रखा गया है। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं के प्रयासों की डीएम रीना जोशी, एडीएम डॉ. शिव कुमार बरनवाल सहित कई लोगों ने खुशी प्रकट की है।
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त्वचा को तरोताजा रखेंगे यह रंग
पिथौरागढ़। जैविक रंग से मनुष्य की त्वचा को कोई नुकसान नहीं होगा। बाजार में बिकने वाले रसायन युक्त रंग से लोगों को एलर्जी सहित कई अन्य दिक्कत होती हैं। नारायणी स्वयं सहायता समूह ने होली में किसी को कोई दिक्कत ना हो इसलिए जैविक रंग बनाए हैं। संवाद