जिले की बालिकाओं ने मुक्केबाजी में बड़ा नाम कमाया है। राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ बालिकाएं प्रदेश स्तर पर भी पदकों की फेहरिस्त लगाती आई हैं। शायद इसीलिए प्रदेश सरकार ने पिथौरागढ़ के स्पोर्ट्स स्टेडियम में चल रहे एथलेटिक्स हॉस्टल को हटाकर बालिका बॉक्सिंग हॉस्टल खोल दिया है।
राष्ट्रीय बॉक्सिंग में नाम कमाने वाली बालिकाओं में कमला बिष्ट सबसे ऊपर है। उसने 2005 में राष्ट्रीय महिला ओपन बॉक्सिंग में कांस्य पदक, 2007 में सीनियर महिला राष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक, 2007 में महिला इंडिया बॉक्सिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक, 2010 में सीनियर महिला ओपन बॉक्सिंग में कांस्य पदक प्राप्त किया। कमला ने 2008 में मास्को में हुई अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया था। 2011 में उसने सीनियर महिला बॉक्सिंग में कांस्य पदक, 2015 में हुए राष्ट्रीय खेलों में राज्य का प्रतिनिधित्व किया। 2015 में ही हुई आल इंडिया पुलिस महिला बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक और वर्ष वर्जीनिया में हुई विश्व महिला पुलिस गेम्स में स्वर्ण पदक जीता। इस साल भी असम में हुई सीनियर महिला बॉक्सिंग में वह अपने खाते में रजत पदक डालने में कामयाब हो चुकी है। इनके अलावा हेमंती मेहता ने 2009 सीनियर महिला बॉक्सिंग में कांस्य पदक, फेडरेशन कप फुटबाल में रजत पदक जीता।
मोनिका सौन ने 2007 में राष्ट्रीय सब जूनियर में स्वर्ण पदक, 2011 में हुए चाइना कप में भारत का प्रतिनिधित्व किया, 2012 में सीनियर राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग में रजत पदक, अखिल भारतीय अंतर विश्वविद्यालयी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता। राष्ट्रीय महिला बॉक्सिंग में नाम और पदक कमाने वालों में कृष्णा थापा, सुनीता मेहता, ममता, हिमानी पंत, ज्योति खड़ायत, बबीता बिष्ट, रश्मि अधिकारी, ललिता खड़का, लीला थापा, आंचल रफाल, दीपा बिष्ट, विनीता महर, नीलम मेहता का नाम भी जुड़ा है। जिला क्रीड़ा अधिकारी विनोद सिंह वल्दिया बताते हैं कि आज भी बॉक्सिंग सीखने के लिए कई बालिकाएं आती हैं और जिला स्तर से लेकर प्रदेश स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेती हैं।
बॉक्सिंग प्रशिक्षण के लिए बेहतर माहौल
जिला क्रीड़ा अधिकारी विनोद सिंह वल्दिया का कहना है कि पिथौरागढ़ में बालिकाओं के बॉक्सिंग सीखने के लिए अच्छा माहौल है। स्पोर्ट्स स्टेडियम में बॉक्सिंग कोच केएस महर बड़ी मेहनत से बालिकाओं और बालकों को बॉक्सिंग का प्रशिक्षण देते हैं। हॉस्टल वार्डन के तौर पर सुनीता मेहता की तैनाती की गई है। वह भी अलग से बालिकाओं को प्रशिक्षण देती हैं।