पिथौरागढ़। सीमांत जिले में वर्ष 2006 से स्वीकृत जिला जेल को बनने में 17 साल लग गए। वर्ष 2007 से निर्माणाधीन जेल का अब भी 98 प्रतिशत कार्य ही पूरा हुआ है। कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज (सीएनडीएस) ने वर्ष 2022 तक जेल का निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा था लेकिन अब भी जेल के अंदर सड़क समेत अन्य निर्माण कार्य शेष हैं।
वर्ष 2007 में तत्कालीन अनुमानित लागत के आधार पर चार करोड़ की राशि जारी की गई जो किस्तों में दी गई। इस कारण वर्ष 2012 तक जिला जेल की चहारदीवारी और एक प्रशासनिक भवन का ही निर्माण पूरा हो सका। इसके बाद जेल निर्माण के लिए कोई राशि सरकार ने जारी नहीं की।
जिले में कैदियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जेल की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इस पर शासन ने अधूरी पड़ी जेल के निर्माण को पूरा कराने के लिए वर्ष 2020 में 22 करोड़ की राशि स्वीकृत की। इस राशि से दो वर्षों में जिला जेल का निर्माण पूरा किया जाना था लेकिन अभी जेल का 98 प्रतिशत कार्य ही पूरा हो पाया है।
जिला जेल में बनाए गए हैं 80 बैरक
पिथौरागढ़। जिला जेल में 60 पुरुष और 20 महिला कैदियों को रखने की व्यवस्था होगी। कुल 80 बैरक बनाए गए हैं जिसमें 10 बैरक खतरनाक अपराधियों के लिए होंगे। इसके अलावा जेल परिसर में कैदियों के लिए एक अस्पताल बनाया गया है। कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन भी बनाया गया है। संवाद
सीमांत जिले में सजायाफ्ता कैदियों को रखने के कोई इंतजाम नहीं
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में अब तक सजायाफ्ता कैदियों को रखने के कोई इंतजाम नहीं है। उन्हें अल्मोड़ा जेल भेजा जाता है। इससे अल्मोड़ा जेल पर तो दबाव बढ़ता ही है। साथ ही कैदियों को लाने ले जाने में पुलिस को अच्छी खासी रकम खर्च करनी पड़ती है। रास्ते में कैदियों के भागने का भी खतरा बना रहता है। जेल बनने के बाद जिले के कैदियों को कहीं नहीं ले जाना पड़ेगा। संवाद
चंडाक में बन रही जेल का 98 प्रतिशत कार्य पूरा हो गया है। अभी रंगाई-पुताई का कार्य किया जा रहा है। इसके अलावा जेल के अंदर सड़क सहित कई अन्य कार्य होने हैं। -कमल सिंह कुरिया, कनिष्ठ अभियंता सीएनडीएस पिथौरागढ़।