पिथौरागढ़ रोडवेज वर्कशॉप में टायरों, पार्ट्स के अभाव में खड़ी बसें। संवाद
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में नई बस मिलने से रोडवेज सेवा के पटरी पर आने की उम्मीदों को झटका लगा है। परिवहन निगम को मिलीं 100 बसों में से पिथौरागढ़ डिपो के हिस्से में सिर्फ दो ही आई हैं। ऐसे में यात्रियों को अब भी खटारा बसों में ही सफर करना होगा।
पिथौरागढ़ डिपो के बेड़े में शामिल 64 में से 21 बसें अपनी उम्र पार कर चुकी हैं। ये बसें सात लाख किलोमीटर का सफर तय कर चुकी हैं। मानकों के मुताबिक अब ये बसें पहाड़ की सड़कों पर चलने लायक नहीं हैं। यात्रियों की सुरक्षा की दृष्टि इन बसों का संचालन अब पहाड़ की बदहाल सड़कों पर नहीं हो सकता। ऐसा संभव नहीं है और डिपो के लिए पुरानी खटारा बसों को दौड़ाना मजबूरी होगा।
डिपो को यात्रियों का सफर आरामदायक बनाने के लिए 21 नई बसों की जरूरत है। पर्याप्त नई बसें न मिलने से डिपो को पुरानी खटारा बसों का ही संचालन करना होगा। इसकी मार यात्रियों को सहनी होगी। डिपो बमुश्किल बूढ़ी बसों को जुगाड़ के भरोसे ठीक कर इनका संचालन कर यात्रियों को राहत पहुंचा रहा है। वहीं उम्र पार कर चुकीं बसों को पहाड़ की सड़कों पर दौड़ाकर यात्रियों की सुरक्षा को भी अनदेखा किया जा रहा है।
आठ बसें वर्कशॉप में खड़ीं, न टायर मिल रहे न स्पेयर पार्ट्स
पुरानी और खटारा बसें आए दिन डिपो के साथ ही यात्रियों का साथ छोड़ रही हैं। कुछ दिन पहले तक डिपो की लगभग 20 बसें टायरों और स्पेयर पार्ट्स के अभाव में वर्कशॉप में खड़ी थीं। इनके लिए रबड़ चढ़े 80 टायरों की डिमांड के सापेक्ष सिर्फ 30 टायर ही उपलब्ध हो पाए। अब भी आठ बसें वर्कशॉप में टायर और स्पेयर पार्टस न मिलने से खड़ी हैं। डिपो को उम्मीद थी कि नई बसें मिलने से रोडवेज सेवा पटरी पर आएगी लेकिन यह उम्मीद दम तोड़ गई है।
कोट
डिपो को 21 नई बसों की जरूरत है। 100 के सापेक्ष 49 नई बसें उत्तराखंड पहुंची हैं। अन्य बसें आने पर पिथौरागढ़ डिपो को भी इनके मिलने की उम्मीद है। फिलहाल दो नई बस जल्द डिपो में पहुंचेंगी। - रविशेखर कापड़ी, एआरएम, पिथौरागढ़ डिपो