पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ का नामिक और बागेश्वर का पिंडारी ग्लेशियर लगातार पीछे खिसक रहे हैं। पिछले 50 वर्षों में दोनों हिमनद करीब डेढ़ किमी तक पीछे चले गए हैं। नामिक में इस सीजन को छोड़ दें तो पिछले कई वर्षों से जमकर बर्फ नहीं पड़ रही है। इसका असर स्थानीय फसलों पर पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन और मानवीय दखल इसके बड़े कारण हैं।
पिथौरागढ़ और बागेश्वर गांव की सीमा पर बसे नामिक गांव में एक दशक पूर्व तक सर्दियों के सीजन में 2-3 फुट तक बर्फबारी होती थी। धीरे-धीरे बर्फ गिरनी कम हो गई। गांव के ही शिक्षक भगवान सिंह ने बताया कि पहले ग्लेशियर गांव के करीब था जो लगातार पीछे की ओर जा रहा है।
80 वर्षीय दान सिंह टाकुली ने बताया कि पूर्व में बर्फ से क्षेत्र के बुग्याल हरे-भरे रहते थे। अब गांव तो क्या बुग्यालों में भी बर्फ देखने को तरस जाते हैं। इसका असर राजमा, आलू समेत अन्य फसलों पर भी देखा जा रहा है। बता दें कि क्षेत्र के दो हिमनद नामिक और हीरामणि से पूर्वी राम गंगा निकलती है। हिमनदों में बर्फ नहीं होने से राम गंगा में भी पानी कम हो गया है।
करीब आठ इंच बर्फ पड़ने से ग्रामीण खुश
नामिक गांव में आठ साल बाद इस सीजन में हुई बर्फबारी से ग्रामीण काफी खुश हैं। पूर्व प्रधान तुलसी जैम्याल ने बताया कि बीते दिन गांव में करीब आठ इंच तक बर्फ पड़ी है। इससे सूख रही फसलों को जीवनदान मिला है। शिक्षक भगवान सिंह ने बताया कि शनिवार को मौसम साफ रहने और धूप खिलने से बर्फ तेजी से पिघल रही है। मौसम में बदलाव से ग्रामीण भविष्य को लेकर बेहद चिंतित हैं।
कोट
पिंडारी और नामिक दोनों ग्लेशियर पीछे की ओर खिसक रहे हैं। वर्ष 1976 से लेकर अब तक पिंडारी ग्लेशियर डेढ़ से दो किलोमीटर तक पीछे खिसक गया है। नामिक ग्लेशियर भी इसी से लगा है। ग्लेशियरों के सिकुड़ने का बड़ा कारण वैश्विक तापमान में वृद्धि, जाड़ों में बर्फबारी न होना, बढ़ता पर्यटन (मानवीय दखल) है। - डॉ. नवीन चंद्र जोशी, वरिष्ठ वैज्ञानिक उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, अल्मोड़ा
फोटो 24 पीटीएच 02 पी- पिथौरागढ़ का नामिक हिमनद (फाइल फोटो)
फोटो 24 पीटीएच 03 पी- वसंत पंचमी पर नामिक में हुई बर्फबारी। स्रोत: ग्रामीण
दिनेश