पिथौरागढ़। जिले के अस्पतालों में आईपीएचएस मानक खत्म होने से सभी उप केंद्रों में फार्मासिस्ट के पद कम हो गए हैं जबकि उपकेंद्रों में मरीजों की जांच से लेकर दवा वितरण समेत अन्य कार्यों का दायित्व फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। ऐसे में वहां बिना फार्मासिस्ट के लोगों का उपचार संभव नहीं है।
जिले के आठ विकासखंड के अस्पतालों में चीफ फार्मासिस्ट समेत फार्मासिस्ट के 144 पदों में से 40 पद रिक्त चल रहे हैं। जबकि 104 फार्मासिस्ट कार्यरत हैं। आईपीएचएस मानक लागू होने के बाद जिला और महिला अस्पताल एक हो गए हैं। यह मानक लागू होने के बाद फार्मासिस्ट के पांच पद ही रह गए हैं। पांच के लिए सभी काम कर पाना संभव नहीं है। पूर्व में जिला अस्पताल में मुख्य फार्मासिस्ट समेत 11 फार्मासिस्ट के पद थे लेकिन आईपीएचएस मानक लागू होने के बाद पांच पद ही रह गए हैं।
धारचूला उप जिला चिकित्सालय में मुख्य फार्मासिस्ट समेत तीन, सीएचसी में मुख्य और एक फार्मासिस्ट, पीएचसी में एक-एक फार्मासिस्ट का पद रह गया है। स्वास्थ्य उपकेंद्रों में फार्मासिस्ट के पद हटा दिए गए हैं। उपकेंद्रों में सीएचओ की तैनाती कर दी गई है। धारचूला, डीडीहाट सीएचसी में दो फार्मासिस्ट का पद स्वीकृत हैं, लेकिन कार्यरत एक ही है। मुख्य अस्पतालों में फार्मासिस्ट को ऑनलाइन, कागजी कार्यवाही, दवा लाना, स्टॉक रजिस्टर का रख रखाव भी करना पड़ता है। कम संख्या होने के कारण फार्मासिस्ट ठीक से काम नहीं कर पा रहे हैं।
कोट
आईपीएचएस मानक लागू होने के बाद फार्मासिस्ट के पदों की संख्या कम हो गई है। महिला और जिला अस्पताल एक हो गए हैं। ऐसे में पांच फार्मासिस्ट के लिए दोनों जगह काम कर पाना संभव नहीं है।
- प्रकाश वर्मा, जिला मंत्री, फार्मासिस्ट एसोसिएशन।
चिकित्सालयों में मरीजों की संख्या अक्सर बढ़ती रहती है। जिला अस्पताल में सबसे अधिक मरीज उपचार के लिए आते हैं। ऐसे में मरीजों के हिसाब से फार्मासिस्ट के पदों की संख्या सृजित की जानी चाहिए। - केएस अधिकारी, वरिष्ठ फार्मासिस्ट।