डीडीहाट की रामलीला में राम-सुग्रीव संवाद
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अस्कोट की रामलीला में राम वन गमन के बाद सुमंत के विलापों से माहौल में उदासी छा गई। डीडीहाट की रामलीला में बाली वध और लंका दहन की लीला का मंचन किया गया। वड्डा और विशाड़ में रामलीला जारी है।
अस्कोट की रामलीला में वनवास के दृश्यों का मार्मिक मंचन किया गया। भगवान राम को सरयू नदी के तट पर छोड़ने के बाद वापसी में मंत्री सुमंत बेहद गमगीन हो जाते हैं। कहते हैं-अवध में कह मुख ले जाऊं, कहूं क्या पूछे जब राजा। राम-लखन वन को गए, मैं लौटा घर आय। निषाद राज गुह भगवान राम, माता सीता, शेषावतार लक्ष्मण को गंगा पार उतारते हैं। भगवान राम चित्रकूट में कुटिया बनाकर रहने लगते हैं। अस्कोट की रामलीला में थानाध्यक्ष दीपक बिष्ट ने लोगों को यातायात नियमों का पालन करने समेत कई मसलों पर जागरूक किया।
डीडीहाट की रामलीला में शबरी की सलाह पर भगवान राम सुग्रीव से मित्रता करते हैं। बाली-सुग्रीव का भीषण युद्ध होता है। भगवान राम बाली का वध करते हैं। सुग्रीव राज्याभिषेक के बाद हनुमान को दूत बनाकर माता सीता की खोज में लंका भेजा जाता है। हनुमान माता सीता को प्रभु राम, लक्ष्मण की कुशलता की सूचना और युद्ध की तैयारी की जानकारी देते हैं। हनुमान माता सीता की आज्ञा पर अशोक वाटिका में फल खा रहे होते हैं। राक्षस उन पर हमला करते हैं। हनुमान रावण पुत्र अक्षय कुमार समेत तमाम राक्षस योद्धाओं को मार डालते हैं। रावण पुत्र मेघनाद हनुमान को बंदी बनाकर रावण दरबार में ले जाता है। हनुमान की पूंछ में आग लगा दी जाती है। हनुमान लंका जला डालते हैं।