इस तहसील के नाघर, कुम्डार, नंगधर, सौरलेख में हो रहे अवैध खनन से आक्रोशित क्षेत्र के लोगों ने सोमवार को जिला मुख्यालय में उग्र प्रदर्शन किया। अवैध खनन के कारण पैराग्लाइडिंग के टेकऑफ साइड खतरे में पड़ गई है। इन गांवों के ऊपरी हिस्से में खनन के कारण बड़ा गड्ढा बन गया है। बारिश के समय यह तबाही का कारण बन सकता है। रविवार रात गांव के लोगों ने खनन सामग्री लेकर आ रहे कई ट्रकों को रोक दिया।
इस मामले में आज अवैध खननकर्ताओं के खिलाफ तहसीलदार के यहां रिपोर्ट भी दर्ज हो चुकी है। आक्रोशित लोगों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर अवैध खनन का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। अमर उजाला ने 29 जून के अंक में अवैध खनन से खतरे में पिथौरागढ़ का पैराग्लाइडिंग स्थल शीर्षक से रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसके बाद लगातार कई रिपोर्ट छापी थी। इस रिपोर्ट के छपने के बाद प्रशासन तो हरकत में नहीं आया लेकिन गांव के लोग खुद ही सबक सिखाने को आगे आ गए हैं।
गांव के लोगों की ओर से लिखाई गई रिपोर्ट में कहा गया है कि रविवार की रात जेसीबी और ट्रकों को लेकर खननकर्ता इलाके में पहुंच गए। जेसीबी वाले तो भाग गए लेकिन ट्रकों को लोगों ने घेर लिया। आक्रोशित लोगों ने अधिकारियों को जमकर खरीखोटी सुनाई। कहा कि उनकी नाक के नीचे खनन हो रहा है और अधिकारी आंख बंद किए हैं।
बाद में डीएम से मुलाकात कर लोगों ने नाघर, कुम्डार, नंगधर, सौरलेख में हो रहे खनन को बंद करने, पाभै-कनारी सड़क को लोनिवि को सौंपने, लोगों को डरा धमकाकर खनन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने, अवैध खनन के कारण जमीन को हो रहे नुकसान की भरपाई करने, कुम्डार अस्पताल के निकट हो रहे खनन पर अंकुश लगाने जैसी मांग की गई। प्रदर्शन में ग्राम प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह, आम आदमी पार्टी के चंद्रप्रकाश पुनेड़ा, गोविंद सिंह बिष्ट, जगदीश कलौनी, नाघर कुम्डार गांव के प्रधान सुरेंद्र सिंह, राजेश भट्ट, दीपक भट्ट, उत्तम सिंह समेत भारी संख्या में लोग थे।
डीएम ने तत्काल जांच के आदेश दिए
पिथौरागढ़। जिलाधिकारी एचसी सेमवाल ने खनन को लेकर लोगों के भारी आक्रोश को देखते हुए मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। डीएम ने बताया कि ग्रामीणों ने जिस खननकर्ता का नाम बताया है उसी से सारी बातें उगलवाई जाएगी। डीएम ने पूरा भरोसा दिलाया है कि किसी भी दशा में खनन नहीं होने दिया जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी का गंभीर रहस्य
पिथौरागढ़। कनारी पाभै, सौरलेख की पहाड़ी पर हो रहे खनन की जानकारी प्रशासन को पहले से ही थी लेकिन इस मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई न होना गंभीर रहस्य को जन्म देता है। गांव के लोगों के आक्रोश का मुख्य कारण भी यही था कि वह प्रशासन पर खनन कर्ताओं से मिला होने का आरोप लगा रहे थे। प्रशासन के पास इसका जवाब नहीं है।