उच्च हिमालयी क्षेत्रों में ठंड बढ़ने के बाद लोग मवेशियों के साथ निचले क्षेत्रों को लौटते हुए। सं?
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धारचूला (पिथौरागढ़)। दारमा घाटी के चीन सीमा के अंतिम ग्राम सीपू और मार्छा के ग्राम लोग अपने जानवरों के साथ माइग्रेशन पर निचले क्षेत्रों की ओर लौटने लगे हैं। वह पांच दिनों में धारचूला पहुंचे। अन्य गांवों के लोग भी अक्तूबर अंतिम सप्ताह और नवंबर प्रथम सप्ताह में आने लगेंगे।
सीपू प्रधान शांति देवी ने बताया कि उनके गांव के 27 परिवार अपने 100 जानवरों के साथ नौ किलोमीटर की पैदल यात्रा कर तिदांग सड़क तक पहुंचे। कुछ लोग वाहनों से पांच घंटे में धारचूला पहुंचे। कुछ परिवार अपने जानवरों के साथ पांच दिनों की पैदल यात्रा करके धारचूला पहुंचे हैं।
मार्छा की प्रधान सुनीता मार्छाल और पूर्व प्रधान जीवन मार्छाल ने बताया कि उनके गांव के 36 परिवार अपने 40 जानवरों के साथ चार किलोमीटर की पैदल यात्रा कर तिदांग पहुंचे। कुछ परिवार वाहनों से पांच घंटे में धारचूला और जानवर के साथ आ रहे परिवार लगभग 60 किलोमीटर पैदल चलकर धारचूला पहुंचे।
दोनों गांव के लोगों ने सरकार से तिदांग और मार्छा सीपू सड़क बनाने की मांग की है। लोगों का कहना है। सड़क नहीं होने उन्हें अब भी नौ किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। जीवन सिंह मार्छाल ने बताया कि कुछ दिनों में अन्य गांव के लोग भी निचली घाटी में आना शुरू करेंगे।