दारमा घाटी से धारचूला की तरफ मौसमी प्रवास पर जाते लोग
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दारमा घाटी के लोग मौसमी प्रवास पर धारचूला आने लगे हैं। शीतकाल में छह महीने तक यह लोग घाटी वाले इलाकों में रहेंगे। उधर, कई स्थानों पर पैदल रास्तों की हालत खराब होने से लोग परेशान हैं। इन रास्तों से जानवरों को लाने में कठिनाई हो रही है। दारमा घाटी के लोग मौसमी प्रवास में धारचूला और जौलजीबी आते हैं। दस नवंबर तक सभी परिवार इन स्थानों पर पहुंच जाएंगे।
दारमा घाटी के गो, फिलम, सौन, बोन, नगालिंग, दुग्तू, दांतू, सीपू, मार्छा गांव के लोग सदियों से मौसमी प्रवास करते हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्र के इन गांवों में नवंबर से ठंड पड़ने लगती है और आवागमन बाधित हो जाता है। लोग अपने घरों में ताले डालकर निकल आते हैं। हर गांव में दो-चार लोग पहरेदारी के लिए रहते हैं। अप्रैल में गर्मी शुरू होते ही इन लोगों की मूल गांवों को वापसी शुरू हो जाएगी। उधर, बोन की प्रधान आशा बोनाल और समाजसेवी किशन बोनाल ने बताया कि बोन से ठाड़ीधार तक का रास्ता बेहद खराब है।
लोनिवि ने इस रास्ते पर मरम्मत का काम सही ढंग से नहीं किया। इस कारण आवागमन में भारी दिक्कत हो रही है। उन्होंने कहा कि रास्ता ठीक न होने के कारण इस बार मौसमी प्रवास में देरी हो रही है। पिछले साल तक इन गांवों के लोग 31 अक्तूबर से पहले मौसमी प्रवास वाले स्थानों पर पहुंच जाते थे।