धारचूला (पिथौरागढ़)। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बसे गांवों के लिए माइग्रेशन शुरू हो गया है। सर्दियों में निचले क्षेत्रों में आए लोग अब मवेशियों के साथ गांवों को लौटने लगे हैं।
गर्मी बढ़ने के बाद दारमा घाटी में ग्राम सेला, चल, नागलिंग, बालिंग, सौन, दुग्तू, दांतू, बोन, फिल्म, गो, ढाकर,तिदांग, मार्छा, सीपू और व्यास घाटी के बूदी, गर्ब्यांग, नपलच्यू, गुंजी, नाभी, रोंगकांग और कुटी के 21 गांवों के ग्रामीणों ने माइग्रेशन शुरू कर दिया है। ग्रामीण छह माह के लिए चार हजार से 12 हजार फुट की ऊंचाई पर बसे अपने मूल गांवों को जानवरों के साथ जाने लगे हैं। व्यास घाटी के अंतिम गांव कुटी (12303 फुट) निवासी चंद्र कुटियाल ने बताया कि उनके गांव में 15 परिवार अपने जानवरों के साथ पहुंच चुके हैं। दारमा घाटी के नांगलिंग निवासी सचिन नगन्याल ने बताया कि उनके गांव में 25 परिवार पहुंच चुके हैं। दांतू गांव के होम स्टे संचालक जमन दताल,पानू दताल, महेश जंग, मनोज जंग, अभिराज दताल, हितेश दताल,भूपेश दताल और ग्राम दुग्तू के होम स्टे संचालक मान सिंह दुग्ताल और प्रकाश दुग्ताल ने बताया कि दारमा घाटी में सड़क खुली होने के कारण पंचाचूली में यात्री एक महीने पूर्व ही पहुंच चुके है। संवाद
घटखोला में सफर जोखिम भरा
धारचूला (पिथौरागढ़)। दुग्तू निवासी प्रकाश सिंह दुग्ताल ने बताया कि ग्राम दर के आपदाग्रस्त क्षेत्र घटखोला का 800 मीटर सड़क मार्ग अब भी जोखिम भरा है। यहां पर आवाजाही में वाहनों को दिक्कत हो रही है। लंबे समय से बीआरओ से यहां पर सड़क ठीक करने की मांग की जा रही है, लेकिन इसके बाद भी सड़क को ठीक नहीं किया जा रहा है। संवाद