चीन सीमा से सटे सोबला में पुल का निर्माण करने की मांग को लेकर क्षेत्र के लोगों ने धारचूला में मौन जुलूस निकालकर विरोध जताया। दारमा घाटी को जोड़ने वाला यह पुल वर्ष 2013 के जलप्रलय में बह गया था।
दारमा घाटी के सामाजिक कार्यकर्ता सुंदर सिंह दुग्ताल, राम सिंह सौनाल, भवान सिंह सोनाल के नेतृत्व में क्षेत्र के ग्राम प्रधानों और लोगों ने अनवर चौक से तहसील कार्यालय तक मौन जुलूस निकाला। इन लोगों ने एसडीएम के माध्यम से केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को ज्ञापन भेजा। कहा कि तेजम नाले पर बना पुल वर्ष 2013 की आपदा में ध्वस्त हो गया था। इस पुल का अब तक पुनर्निर्माण नहीं हुआ है। नतीजतन बरसात में चार महीने जून से सितंबर तक नाले से यातायात बाधित रहता है।
कहा कि दारमा घाटी आईटीबीपी पोस्ट ढांकर तक सड़क से जुड़ गई है। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस मार्ग को बेहतर बनाने के साथ ही तेजम नाले पर पुल बनाना बेहद जरूरी है। संपूर्ण क्षेत्र अनुसूचित जनजाति बाहुल्य है। असुविधाओं के कारण इलाके से 80 प्रतिशत लोग गांव छोड़ चुके हैं।
जुलूस-प्रदर्शन में कांग्रेस नेत्री शकुंतला दताल, छोरी बोनाल, ग्राम प्रधान सीपू सुरेश सीपाल, मार्छा की सूरती देवी, गो गांव की मीरा ग्वाल, दुग्तु के देवराम दुग्ताल, सेला की ममता सेलाल, रं यूथ फोरम के अध्यक्ष पूरन ग्वाल, बीडीसी सदस्य मनोज नगन्याल सुखराज चलाल, जीवन मार्छाल, भूपेंद्र ग्वाल, कृष्ण फिरमाल, विमला देवी, शीला देवी, सरोजनी देवी, गीता देवी, शांति देवी सहित खेला, घाटीबगड़, उमचिया, फिलम, दुग्तू आदि थे।
दारमा में सोबला से तीदांग तक 23.87 करोड़ की लागत से कुल सात पुल बनने हैं। प्रस्तावित स्थान पर आईआईटी रुड़की से सोलर टेस्टिंग की जा रही है। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद पुल निर्माण का काम शुरू होगा।
-गौरव सिंह, एईई, सीपीडब्ल्यूडी