थल कस्बा यहां अलग ब्लाक की मांग उठ रही
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थल में 1952 में ब्लॉक कार्यालय खुल गया था, लेकिन 1965 में इसका अस्तित्व क्यों समाप्त किया गया, यह लोगों को अब तक पता नहीं है। अब स्थिति यह है कि थल में तहसील तो खुल गया है, लेकिन कस्बे के लोग दो ब्लॉकों में बंटे हुए हैं। थल में रामगंगा पार के लोगों को बेड़ीनाग और वार के लोगों को ब्लॉक संबंधी कामों के लिए बेड़ीनाग और डीडीहाट जाना पड़ता है। 600 गांवों के केंद्र पर पड़ने वाले थल को विकासखंड का दर्जा देने संबंधी प्रस्ताव 2009 में यहां के प्रधानों ने शासन को भेजा था। इसमें तर्क दिया गया कि ब्लॉक कार्यालय खुलने से गांवों के विकास में तेजी आएगी।
आज भी लोग थल में विकासखंड मुख्यालय खोलने की लड़ाई लड़ रहे हैं। वह ब्लॉक कार्यालय के लिए जमीन देने को भी तैयार हैं। इधर, पिछली सरकार ने जिले में कई नई तहसीलों का गठन तो किया, लेकिन एक भी नया विकासखंड नहीं खोला गया। बताया जाता है कि ब्लॉक खोलने की मंजूरी केंद्र सरकार से लेनी पड़ती है। थल के लोग चाहते हैं कि प्रदेश की नई सरकार को इस दिशा में कदम उठाना चाहिए। क्योंकि अब केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार हैं।
ब्लॉक खोलने में नहीं होनी चाहिए दिक्कत
सामाजिक कार्यकर्ता राम सिंह जंगपांगी का कहना है कि सरकार को थल में ब्लॉक मुख्यालय खोलने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। क्योंकि पहले भी यहां ब्लॉक कार्यालय का काम होता रहा है। यदि सरकार ब्लॉक मुख्यालय की स्थापना करती है तो इससे गांवों के विकास में तेजी आएगी। लोगों को सरकारी योजना का लाभ मिलेगा।
सरकारी काम के संचालन में आसानी होगी
व्यापारी नेता गंगा सिंह मेहता का कहना है कि थल कई गांवों का केंद्र स्थान है। यहां पर ब्लॉक कार्यालय होना चाहिए। इससे लोगों की दुविधा भी समाप्त हो जाएगी। तहसील एक और ब्लॉक दो के झंझट से भी लोगों को मुक्ति मिलेगी। इससे लोगों को सुविधा मिलेगी और सरकारी कामकाज के संचालन में आसानी होगी।