उच्च हिमालयी क्षेत्र के नामिक के लिए बागेश्वर जिले के गोगिना से स्वीकृत सात किमी सड़क के निर्माण की मांग को लेकर नामिक के लोग 146 किमी की दूरी तक कर जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने अपर जिलाधिकारी आरडी पालीवाल को जिलाधिकारी के नाम संबोधित ज्ञापन देकर सड़क का शीघ्र निर्माण करने की मांग की। सड़क न बनने पर शासन के खिलाफ आंदोलन करने व लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी।
नामिक की प्रधान तुलसी जेम्याल के नेतृत्व में जिला मुख्यालय पहुंचे लोगों ने एडीएम को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि नौ दिसंबर 2016 को गोगिना से नामिक तक सात किमी सड़क को मंजूरी मिली। 16 दिसंबर 2016 को निविदा आमंत्रित की थी। लोनिवि के डीडीहाट डिवीजन ने आज तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं किया है। उन्होंने कहा कि सात किमी इा सड़क में से 6 किमी का हिस्सा पिथौरागढ़ जिले में आता है। लोनिवि डीडीहाट को 6 किमी सड़क निर्माण के साथ ही एक पुल का निर्माण रामगंगा में करना है। सड़क का निर्माण न होने से लोग काफी परेशानी झेल रहे हैं। कहा है कि सड़क का निर्माण न होने पर आंदोलन छेड़ शुरू किया जाएगा।
ग्रामीणों ने कहा है कि गांव के लोगों ने सड़क को लेकर 2012 के विधानसभा चुनावों का बहिष्कार किया था। सड़क न बनी तो आगामी लोकसभा चुनावों का भी बहिष्कार किया जाएगा। एडीएम ने जिलाधिकारी के माध्यम से बागेश्वर
जिला प्रशासन और लोनिवि डीडीहाट से वार्ता कर सड़क का निर्माण कराने का आश्वासन दिया।
सड़क को लेकर क्रमिक अनशन 18वें दिन भी जारी
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। मणकनाली से पाभें तक स्वीकृत 7.2 किमी की सड़क का निर्माण करने की मांग को लेकर ग्रामीणों का क्रमिक अनशन 18वें दिन भी जारी रहा। मंगलवार को भामा गांव के युवा सुंदर सिंह, सूरज सिंह, शेखर सिंह, विरेंद्र सिंह क्रमिक अनशन में बैठे। आंदोलनकारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कहा कि पणकट्या, पोखरी, जाखनी, भामा, पाभें गांव देश की आजादी के 70 साल बीतने के बाद भी यातायात सुविधा से वंचित हैं। क्षेत्र के लोगों के संघर्ष के बाद सड़क मंजूर हुई। वर्ष 2016 में सड़क के टेंडर हो गए लेकिन अब तक सड़क का काम शुरू नहीं किया गया है। संघर्ष समिति के अध्यक्ष चंचल सिंह भंडारी, संरक्षक पुष्कर सिंह भंडारी ने कहा कि जल्द ही आंदोलन को आमरण अनशन में तब्दील कर दिया जाएगा। क्रमिक अनशन के समर्थन में गोपाल राम, शंकर राम, जोगा राम, भूपाल सिंह, आनंद सिंह, किशन सिंह, पूरन सिंह, कैलाश भंडारी आदि ने धरना दिया।