पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले में प्रस्तावित चार रोपवे को लंबे समय से स्वीकृति का इंतजार है। यदि रोपवे का निर्माण किया जाता है तो इससे पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। लोगों ने सरकार से शीघ्र रोपवे निर्माण को स्वीकृति देने की मांग की है।
वर्ष 2022 में सीमांत में पर्यटन गतिविधियां बढ़ाने और पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए जाजरदेवल से असुरचूला मंदिर, डीडीहाट से मलयनाथ मंदिर, बूंदी से छियालेख, तवाघाट से नारायण आश्रम और मुनस्यारी के बलांती बैंड से खलियाटॉप तक रोपवे निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजे थे। दो साल से यह सभी प्रस्ताव शासन में अटके हैं। जिला पंचायत सदस्य जगत मर्तोलिया, जनमंच के संयोजक भगवान रावत आदि लोगों का कहना है कि अगर यह रोपवे बन जाएं तो सीमांत जिले में पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी। उन्होंने सरकार से इन चारों रोपवे को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग की है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्या का कहना है कि रोपवे निर्माण के प्रस्ताव सरकार को गए हैं। अभी स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलने के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
सतगढ़ से ध्वज मंदिर रोपवे निर्माण घोषणा में ही अटका
पिथौरागढ़। जिले के प्रसिद्ध ध्वज मंदिर के लिए सतगढ़ गांव से रोपवे निर्माण की घोषणा सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित रही है। इस रोपवे के निर्माण की घोषणा पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक और हरीश रावत भी कर चुके हैं। इसके बाद भी आज तक रोपवे का निर्माण नहीं हो पाया है। मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बाद भी रोपवे निर्माण न होने से जनता में निराशा है। संवाद