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छोटी बिजली परियोजनाओं से लोगों को लाभ नहीं

Tue, 31 Jan 2017 10:27 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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थल में बंद पड़ी बरार लघु जल विद्युत परियोजना - फोटो : अमर उजाला
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उत्तराखंड को ऊर्जा प्रदेश बनाने के जुमले कई बार सामने आ चुके हैं। ऊर्जा प्रदेश तभी बनेगा जब बिजली का उत्पादन होगा और जल संसाधन का सही तरीके से उपयोग होगा, लेकिन थल की बरार और गराऊं की लघु जल विद्युत परियोजना से उत्पादन तीन माह से बंद पड़ा है। छह नवंबर को इन दोनों परियोजनाओं में कार्यरत 12 कर्मचारियों ने वेतन न मिलने के कारण काम पर जाना बंद कर दिया था। अब तक इन कर्मचारियों को न तो वेतन मिला है और न परियोजनाओं का संचालन ही हो पाया है।
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बरार लघु जल विद्युत परियोजना से 750 किलोवाट बिजली का उत्पादन होता है। इस परियोजना से पैदा होने वाली बिजली को थल बाजार समेत आसपास के गांवों को दिया जाता है। परियोजना से उत्पादन ठप होने के कारण गांवों को बिजली अब ग्रिड से देनी पड़ रही है। इस कारण लगातार कटौती, लो-वोल्टेज की समस्या फिर से हावी होने लगी है। ठीक इसी तरह गराऊं परियोजना से 350 किलोवाट बिजली का उत्पादन होता है। यह परियोजना भी नवंबर प्रथम सप्ताह से बंद है।

बताया गया कि उरेडा की ओर से संचालित इन बिजली परियोजनाओं को लक्ष्मी मित्तल बालाजी एंड कंपनी को सौंपा गया था। कंपनी ने दोनों स्थानों पर अपने संविदा मजदूर तैनात किए थे। तीन माह से कंपनी ने कर्मचारियों को वेतन का भुगतान ही नहीं किया। इस बारे में उरेडा के अवर अभियंता बीडी सूंठा का कहना है कि अब नई कंपनी के साथ अनुबंध किया जा रहा है, ताकि परियोजनाओं का संचालन सही ढंग से हो सके। उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में पर्याप्त पानी है और मशीनों की हालत भी ठीक है।
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दुर्दशा के लिए सरकार जिम्मेदार
स्थानीय निवासी देवराज सत्याल का कहना है कि परियोजनाओं की दुर्दशा के लिए सरकार जिम्मेदार है। वह कहते हैं कि अनदेखी के कारण ही यह नौबत आई है। जिस कंपनी ने परियोजना का काम हाथ में लिया था उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वह सबसे पहले कर्मचारियों के वेतन का भुगतान करे। 

अन्य नदियों पर भी परियोजना बनें 
स्थानीय निवासी महिराज भैंसोडा का कहना है कि सरकार को कुछ और नई योजनाओं का निर्माण करना चाहिए था। जब पुरानी परियोजनाओं का ही संचालन सही ढंग से नहीं होगा तो नई परियोजनाओं के बारे में सोचना कठिन होगा। वह कहते हैं कि पहाड़ की नदियों पर विद्युत उत्पादन क्षमता का दोहन होना चाहिए। 

बिजली कटौती से उपभोक्ता परेशान
पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में रोज दिन में दो से तीन घंटे तक हो रही बिजली की कटौती से आम उपभोक्ता खासे परेशान हैं। कुछ इलाकों में शाम के समय भी कटौती की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि लाइन की मरम्मत के लिए शटडाउन लेना पड़ रहा है। ग्रामीण अंचलों में भी लोग बिजली कटौती से खासे परेशान हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में चार-चार घंटे तक कटौती की जा रही है।
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