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लट्ठों के सहारे नदी पार कर रहे लोग

Wed, 13 Jul 2016 10:03 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुनस्यारी
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लट्ठों के सहारे नदी पार करती एक बुजुर्ग महिला - फोटो : अमर उजाला
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पातो से रालम गांव जाने के लिए लोगों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। लिंगुरानी के पास नदी पर आवागमन के लिए बने लकड़ी के पुल की सारी लकड़ियां बह गई हैं और लोगों को लट्ठों के सहारे नदी पार करना पड़ रहा है, यदि इन लट्ठों में किसी का बैलेंस बिगड़ गया तो वह सीधे नदी में गिरेगा।
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चार मई 2014 को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हेलीकॉप्टर से पातो गांव का दौरा किया था। पातो गांव के लोग रालम गांव में ग्रीष्मकालीन प्रवास पर जाते हैं। मुख्यमंत्री ने लोगों की समस्या सुनने के बाद लीलम से पातो तक सड़क बनाने, पातो से रालम तक पैदल मार्ग का निर्माण करने और हर नदी पर पक्के पैदल पुल बनाने की घोषणा की थी। पातो गांव के समाजसेवी हरीश दरियाल के नेतृत्व में बुधवार को तहसील मुख्यालय पहुंचे लोगों ने एसडीएम को सारी स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने लिंगुरानी के पास गोरी नदी के ऊपर लट्ठों के सहारे आरपार कर रहे लोगों की विवशता का जिक्र करते हुए कहा कि यह कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकता है।

दरियाल ने कहा कि मुख्यमंत्री के दौरे को दो साल पूरे हो गए हैं, लेकिन गांव के लोगों की समस्या हल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लिंगुरानी पर बना पुल जून 2013 की आपदा के समय बह गया था। उसकी जगह अस्थायी व्यवस्था में लकड़ी का पुल बनाया गया। इस पुल की लकड़ियां सड़ गई हैं। सिर्फ लट्ठे बचे हैं। यही लट्ठे लोगों के आवागमन का साधन हैं। ज्ञापन देने वालों में मनोहर दरियाल, हरीश ढकरियाल, नरेंद्र दरियाल, प्रेम राम, राजेश कुमार, धर्मेंद्र कुमार आदि थे। एसडीएम कौस्तुभ मिश्रा ने कहा कि शीघ्र ही रालम जाने वाले रास्ते पर लकड़ी के पुल की मरम्मत की जाएगी और पक्के पुल के निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
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