प्रसव पीड़िता को डोली में बिठाकर गांव को ले जाते लोग
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गांधीनगर गांव की एक प्रसव पीड़िता को पहले गांव के लोग अस्पताल लाने के लिए पांच किलोमीटर दूर तक डोली में बैठाकर लाए, फिर प्रसव होने के बाद भी उसे इसी तरह गांव तक पहुंचाना पड़ा। महिला को पीपीपी मोड से संचालित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया था, लेकिन डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
गांधीनगर गांव के देवराम की पत्नी कौशल्या देवी को प्रसव पीड़ा होने पर गांव के लोग 17 जून को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाए थे। वहां पर डॉक्टरों ने बिना किसी जांच के जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। अगले दिन परिजन कौशल्या को जिला अस्पताल लेकर गए। वहां पर सामान्य तरीके से प्रसव हो गया। बाद में कौशल्या को गांव तक ले जाने के लिए पहले इमला नामक स्थान पर वाहन से ले गए।
वहां से पांच किलोमीटर दूर गांधीनगर गांव के लिए उनको फिर से डोली का इंतजाम करना पड़ा। सड़क और स्वास्थ्य की सुविधा न होने के कारण यह गरीब परिवार मुसीबत में पड़ गया। सीमांत शिल्पी विकास समिति के अध्यक्ष डा. दुर्गा प्रसाद ने कहा कि लोग बड़ी कठिनाई से मरीजों को अस्पताल लाते हैं, लेकिन पीपीपी मोड से संचालित अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों का रवैया ठीक नहीं है।