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Uttarakhand: एक ऐसा अस्पताल जहां नहीं मिल पाता मरीजों को प्राथमिक इलाज, 15 हजार से ज्यादा की आबादी परेशान

Thu, 13 Nov 2025 01:34 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़

सार

पिथौरागढ़ जिले के देवलथल स्थित ऐलोपैथिक अस्पताल की स्थिति चिंताजनक है। यह अस्पताल 40 से अधिक गांवों की 15 हजार की आबादी की स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र होना चाहिए, लेकिन यह मूलभूत सुविधाओं से पूरी तरह वंचित है। 
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सांकेतिक तस्वीर।
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विस्तार
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पिथौरागढ़ जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे धरातल पर बेअसर दिख रहे हैं। ऐसा ही कुछ हाल है ऐलाेपैथिक अस्पताल देवलथल का। यहां न तो प्रसव की सुविधा है और ना ही जांच की। ऐसे में प्रसव और मामूली इलाज के लिए भी गर्भवतियों और मरीजों को हायर सेंटर जाना पड़ रहा है।

देवलथल में बाराबीसी क्षेत्र के बिसौनाखान, बुंगाछीना, बमडोली, मोडी, चमू, अलगड़ा सहित 40 से अधिक गांवों की 15 हजार से अधिक की आबादी को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ऐलोपैथिक अस्पताल खोला गया है। मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा यह अस्पताल खुद ही बीमार पड़ा है। अस्पताल में एक डॉक्टर और एक फार्मासिस्ट तैनात है लेकिन न तो यहां प्रसव की सुविधा है और ना ही जांच के लिए लैब।

गर्भवतियों का स्थानीय स्तर पर प्रसव कराने के लिए एक भी स्टाफ नर्स की यहां तैनाती नहीं हुई है। लैब के बगैर रोग की पहचान करना स्वास्थ्य कर्मियों के लिए मुश्किल हो जाता है। ऐसे में मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना अस्पताल प्रबंधन की मजबूरी बन जाता है। मामूली इलाज के लिए भी मरीजों को अन्य अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

क्षेत्र के लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि लंबे समय से इस अस्पताल के उच्चीकरण की मांग की जा रही है लेकिन इसके लिए स्वास्थ्य विभाग गंभीर नहीं है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि अस्पताल का उच्चीकरण होने से यहां स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होता, इसका लाभ क्षेत्र की बड़ी आबादी को मिलता।

अस्पताल में लगे हैं चार बेड, आज तक भर्ती नहीं हुआ मरीज

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देवलथल ऐलोपैथिक अस्पताल में मरीजों और गर्भवतियों को भर्ती करने के लिए चार बेड लगे हैं। हैरत की बात है कि आज तक कोई भी मरीज इस अस्पताल में भर्ती नहीं हुआ है। लेबर रूम स्थापित न होने और स्टाफ नर्स की तैनाती न होने से यहां प्रसव नहीं हो रहे हैं। ऐसे में क्षेत्र की गर्भवतियां प्रसव के लिए लंबा सफर तय कर जिला मुख्यालय जाने के लिए मजबूर हैं।

बोले लोग

हमारे क्षेत्र में अस्पताल तो खोला गया है जो मरीजों और गर्भवतियों के काम नहीं आ रहा है। लंबे समय से इसके उच्चीकरण की मांग की जा रही है ताकि यहां स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हो सके। कोई भी इसके लिए गंभीर नहीं है। - राज बर्ना, प्रधान, बर्नागांव

यदि देवलथल अस्पताल का उच्चीकरण होता तो यहां स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार होता। क्षेत्र का हर व्यक्ति इसकी मांग कर रहा है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अब आंदोलन ही एकमात्र रास्ता नजर आ रहा है। - गोकुल कुमार, बीडीसी सदस्य, लोहाकोट

अस्पताल में न जांच की सुविधा है और न प्रसव की। सबसे अधिक दिक्कत गर्भवतियों को हो रही है। उन्हें प्रसव के लिए लंबा सफर तय कर जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के दावे क्षेत्र के लोगों के हवाई हैं। - निशा सामंत, प्रधान, चौपाता

स्थानीय स्तर पर खोला गए अस्पताल में मामूली रोगों का इलाज ही मिल रहा है। ऐसे में क्षेत्र का हर मरीज और गर्भवती अन्य अस्पतालों में जाने के लिए मजबूर है। हमारे क्षेत्र के अस्पताल में भी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होनी चाहिए। - रंजना अधिकारी, प्रधान, हराली

अस्पताल का उच्चीकरण करना शासन स्तर पर ही संभव है। यहां लैब स्थापित करने के साथ ही प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है। - डॉ. प्रशांत धानिक, प्रभारी चिकित्साधिकारी, पीएचसी, कनालीछीना

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