उत्तराखंड क्रांति दल और राज्य आंदोलनकारियों ने भारत और नेपाल के सहयोग से बनने जा रहे पंचेश्वर बांध को विनाशकारी बताते हुए कहा कि भारत सरकार को 6000 मेगावाट के महाबांध को बनाने से बचना चाहिए। दल ने पंचेश्वर बांध के विरोध में लोगों को लामबंद करने के लिए अभियान चलाने का निर्णय लिया है। किरगांव ऐंचोली में हुई उक्रांद और राज्य आंदोलनकारी ताकतों की बैठक में कहा कि वह लोग छोटे बांधों के विरोधी नहीं हैं। बड़े बांध जो भविष्य ही क्या वर्तमान में भी चिंता का कारण बनते हों, उनको कतई नहीं बनने दिया जाएगा। बांध में कई गांव डूब जाएगी।
खेती लायक जमीन, ऐतिहासिक, पौराणिक मंदिर पानी में समा जाएंगे। परियोजना में 30000 से अधिक परिवार प्रभावित हो रहे हैं। सरकार उनके विस्थापन की योजना तैयार नहीं कर पाई है। कहा कि देश की सीमाओं की मजबूती के लिए बड़े बांध नहीं, मजबूत आर्थिक विकास की योजनाएं लागू करने की दरकार है। बैठक में गैरसैंण राजधानी का मसला हाशिये में धकेलने की आलोचना की गई। कहा गया कि राज्य बनने के सपने पूरे करने में भाजपा, कांग्रेस नाकाम रहे हैं। राज्य आंदोलन में युवाओं ने अहम भूमिका निभाई थी। आज प्रदेश में सबसे अधिक हताश और निराश युवा ही है।
पलायन के कारण गांव के गांव खाली हो रहे हैं। सत्ता सिंहासन में बैठने वाले दोनों दल एक दूसरे पर घपले, घोटाले के आरोप लगाने तक सीमित हैं। जांच का एलान कर एक-दूसरे को डराने का काम किया जा रहा है। उक्रांद एससी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष चंद्रप्रकाश कोहली की अध्यक्षता और ललित महर के संचालन में हुई बैठक में पुष्कर सिंह धामी, जगत सिंह मेहता, हयात सिंह, तारा सिंह, बीडी कोहली, सुभाष कुमार, अजय कोहली, दीवान मेहता, पूरन बिष्ट, प्रेम सिंह आदि मौजूद थे।