पिथौरागढ़। सीमांत जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी की उम्मीद में बन रहे मेडिकल कॉलेज का संचालन इसी वर्ष से करने के दावों को साकार करना चुनौती बन गया है।
अधूरी व्यवस्थाओं के चलते एनएमसी की अनुमति न मिलने से चिकित्सा शिक्षा विभाग की दिक्कत बढ़ गई है। अब विभाग व्यवस्थाओं को पूरी करने की जोर-आजमाइश करते हुए एनएमसी को दोबारा अपील करने की तैयारी कर रहा है।
इस तैयारी को अंजाम तक पहुंचाने के लिए मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी सहित, अस्पताल, ओटी, लैब, वार्ड सहित अन्य व्यवस्थाओं और संसाधनों को जुटाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
85 के सापेक्ष मिली सिर्फ 13 फैकल्टी
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक, इसके संचालन के लिए 85 फैकल्टी जरूरी है। अब तक आठ प्रोफेसर, एक असिस्टेंट प्रोफेसर, चार एसोसिएट प्रोफेसर सहित कुल 13 फैकल्टी की तैनाती हुई है।
एनएमसी की अनुमति न मिलने के पीछे फैकल्टी की भारी कमी ही बड़ा कारण रहा है। सितंबर में मेडिकल की पढ़ाई शुरू हो जाएगी। अपील को अंजाम तक पहुंचाने के लिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन को दो महीने के भीतर फैकल्टी की कमी को पूरा करना होगा जो किसी चुनौती से कम नहीं है।
ओटी, लैब, वार्डों के लिए नहीं मिला पर्याप्त सामान
मेडिकल कॉलेज में एनएमसी की अनुमति पाने के लिए ओटी, लैब, वार्ड और अस्पताल जरूरी है। अब तक सिर्फ इनके लिए भवन और कक्ष तैयार हो सके हैं। एनएमसी की टीम ने निरीक्षण में इन अधूरी व्यवस्थाओं के चलते अनुमति नहीं दी। अब तक भी ओटी, लैब, वार्डों के लिए पर्याप्त सामान उपलब्ध नहीं हो सका है। ऐसे में एनएमसी अनुमति देने के लिए की जा रही अपील पर गौर करेगी या इससे हाथ पीछे खींचेगी, मेडिकल कॉलेज प्रबंधन इस चिंता में डूबा है।
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फैकल्टी की तैनाती के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ओटी, लैब और वार्डों के लिए सामान उपलब्ध हो रहा है। कमियों को दूर कर जल्द ही अनुमति के लिए एनएमसी से अपील की जाएगी। उम्मीद है अनुमति मिलेगी और इसी साल मेडिकल कॉलेज का संचालन होगा।
-डॉ. एके सिंह, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, पिथौरागढ़