नवनिर्मित आंवलाघाट पेयजल योजना की लाइनों में जंग के चलते दूसरे दिन भी नगर में गंदे पानी की आपूर्ति हुई। क्षेत्रवासियों ने इस गंदे पानी को पेयजल के लिए इस्तेमाल नहीं किया। इस कारण क्षेत्रवासियों को पेयजल संकट से अब तक निजात नहीं मिल पाई है।
शुक्रवार को भी लोनिवि जोन के खड़कोट, सेरा, घंटाकरण, बैंक रोड, सिल्थाम आदि क्षेत्रों में गंदे पानी की आपूर्ति हुई। गंदा पानी आने पर लोगों ने इसका इस्तेमाल सिर्फ कपड़े और बर्तन धोने में ही किया। दूसरी ओर आंवलाघाट योजना से आपूर्ति सुचारु नहीं होने से नगर के डिग्री कॉलेज, जीआईसी रोड, पांडेगांव, जगदंबा कॉलोनी, सरस्वती विहार आदि क्षेत्रों में पानी की समस्या रही। सैकड़ों घरों में दिनभर मांग का आधा पानी भी नहीं आया। इन क्षेत्रों में आपूर्ति का हाल यह था कि दिनभर 80 लीटर पानी से काम चलाना पड़ा। पानी के बंदोबस्त के लिए नगर और आसपास के नौलों, धारों, स्टैंडपोस्ट पर भीड़ लगी रही।
बता दें कि जल संस्थान को ठुलीगाड़, घाट और रई योजना से बमुश्किल साढ़े छह एमएलडी पानी मिल रहा है, जबकि जरूरत कम से कम 12 एमएलडी की है। आंवलाघाट योजना बनने के बाद पानी की समस्या से निजात की उम्मीद थी, लेकिन निगम की लापरवाही के चलते लोकार्पण के सातवें दिन भी आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी। जल संस्थान के ईई विशाल कुमार ने बताया कि नई योजना की लाइनों के जंग के चलते गंदा पानी आया। इसके कारण आंवलाघाट योजना से आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी।
ग्रामीण क्षेत्रों में गहराई समस्या
मुख्यालय से पांच किमी दूर चंडाक के छेड़ा और दिगतोली गांव में पेयजल की समस्या और गहरा गई है। जाजरदेवल में लोगों को पेयजल के लिए तरसना पड़ रहा है। इन गांवों में जलस्रोत के डिस्चार्ज में कमी आने से समस्या गहरा रही है। पेयजल योजनाओं से मांग का आधा पानी भी नहीं मिल पा रहा। ऐसे में ग्रामीणों को पीने के लिए दूसरे गांवों से पानी ढोना पड़ रहा है। जल संस्थान प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में टैंकरों से आपूर्ति कर रहा है, लेकिन मांग को देखते हुए यह नाकाफी साबित हो रहा है।